इससे पहले रेड्डी ने कहा कि 70 साल से उर्दू जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषा है लेकिन जम्मू-कश्मीर में उर्दू भाषा बोलने वाले लोग 0.16 प्रतिशत ही हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू और अंग्रेजी दोनों को आधिकारिक भाषा के तौर पर जारी रखा जाएगा। वह ये भी बोले कि डोगरी वहां दूसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।
रेड्डी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या 1.78 प्रतिशत है। इसलिए इस भाषा को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार किसी भी क्षेत्रीय भाषा के खिलाफ नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्य में बोले जानी वाली पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी के विकास के लिए विधेयक में कई प्रावधान किए गए हैं। उच्च सदन में विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए पीडीपी के मीर मोहम्मद फैज ने कहा कि इसमें पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी भाषा को भी शामिल किया जाए।
भाजपा के एस एस नागर ने पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी को इस सूची में शामिल करने की मांग का समर्थन किया। शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने कहा कि इस विधेयक में पंजाबी को शामिल नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के संविधान में भी पंजाबी एक आधिकारिक भाषा थी। उन्होंने इस विधेयक में पंजाबी को शामिल करने की मांग की। भाजपा के शमशेर सिंह मन्हास ने विधेयक में डोगरी भाषा को आधिकारिक भाषा बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया।