जम्मू में पाकिस्तान की ओर से आप शंभू मंदिर को निशाना बनाने की कोशिश थी... लेकिन भगवान ने बचा लिया। शंभू मंदिर के द्वार के नीचे दुकान चलाने वाले रामबाबू शर्मा का कहना है कि ये सिर्फ डर फैलाना नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को आहत करना भी है।
अगर घटना एक-दो घंटे बाद होती या शेल थोड़ा आगे-पीछे गिरता तो किसी बड़ी अनहोनी का टलना मुश्किल था। यह कहना है जम्मू में आप शंभू मंदिर के द्वार के नीचे दुकान चलाने वाले रामबाबू शर्मा का। रामबाबू के मुताबिक, यह हमला महज धमाका नहीं था, बल्कि सीधी कोशिश थी हमारी आस्था को हिलाने की।
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पाकिस्तान की ओर से दागा गया मोर्टार शेल शनिवार की सुबह करीब छह बजे मंदिर के मुख्य द्वार के पास एक बंद घर के बाहर आकर गिरा। धमाका इतना जोरदार था कि मकान की दीवारों में दरारें आ गईं। खिड़की, दरवाजे क्षतिग्रस्त हो गए। यहां तक कि बंद दरवाजों की कुंडी भी टूट गई।
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा और डर है कि पहले गुरुद्वारों को टारगेट किया गया, फिर मंदिरों को। घटनास्थल पर रामबाबू ने कहा कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना साफ दिखाता है कि दुश्मन का इरादा क्या है।
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ये सिर्फ डर फैलाना नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को आहत करना भी है। जिस रास्ते पर यह शेल गिरा है, उस पर होकर रोज सैकड़ों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए जाते हैं।
रुक-रुक कर क्षतिग्रस्त मकान देख रहे थे लोग
जिस घर के बाहर यह हादसा हुआ, वह करीब 20 दिनों से बंद है। मंदिर जाने वाले श्रद्धालु रुक-रुक कर क्षतिग्रस्त मकान देख रहे हैं। एक श्रद्धालु किशोर पाल ने बताया, उनका घर इस जगह से करीब एक किमी की दूरी पर है। जिस वक्त यह हादसा हुआ, वह मंदिर आने की तैयारी कर रहे थे।
धमाके के वक्त मैं मंदिर में ही था, मगर श्रद्धालु ज्यादा नहीं थे। धमाके से एहसास हो गया कि कहीं आसपास की घटना है। इसलिए तुरंत मंदिर बंद कर दिया। द्वारकानाथ योगी, मंदिर के पुजारी
रात में धमाकों ने डराया, दिन में चहका श्रीनगर
भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार को सीजफायर की घोषणा ने लोगों को चौंका दिया था, मगर इसके बाद भी रात को 8:30 से 9:20 बजे तक करीब 40 धमाकों की आवाजें सुनाई पड़ी थीं। रविवार सुबह लोगों को किसी नुकसान की सूचना नहीं मिली तो जान में जान आई। सुबह के सन्नाटे के बाद दोपहर से बाजारों में रौनक नजर आई। दिन चढ़ने के साथ लोगों की आशंकाएं मिटती चली गई और बाजारों में रौनक लौट आई।
रविवार को लाल चौक मुख्य बाजार की दुकानें बंद रहती हैं, लेकिन यहां सुबह से ही साप्ताहिक बाजार लग जाता है। आम रविवारों की तरह इस रविवार को भी लोग बंद दुकानों के बाहर सजे स्टॉलों से खरीदारी करते दिखाई दिए। स्थानीय दुकानदार अशरफ अहमद ने बताया कि वह हर रविवार यहां कपड़ों का स्टॉल लगाते हैं।
रात को धमाकों की आवाज सुनी थी। तब से ही आशंकित था। सुबह सब खैरियत मिली तो स्टॉल लगाने आ गया। दुकानदार मोहम्मद शफी ने बताया कि दिन आम रविवार की तरह ही बीता। वह यहां फैंसी आइटम का स्टॉल लगाते हैं।
संघर्ष विराम पर दिनभर चली चर्चा
शनिवार को हुए संघर्ष विराम और रात में हुए धमाकों की दिनभर चर्चा होती रही। लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया रही। अधिकतर लोगों का कहना था कि पाकिस्तान को और कड़ा सबक सिखाने की जरूरत थी।
वहीं कुछ लोगों ने इसे ठीक बताया, उनका कहना था कि भारत ने आतंकियों पर कार्रवाई की थी, पाकिस्तान की नागरिकों पर कायराना हमला किया। उम्मीद है कि पाकिस्तान ने इससे सबक सीखा होगा।