परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बाना सिंह
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवां घाटी में सैनिकों की शहादत को परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बाना सिंह ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। देश के 21 परमवीर चक्र विजेताओं में से जीवित तीन जांबाजों में शामिल कैप्टन बाना सिंह ने कहा कि एलएसी पर गोली नहीं चली है। इसे युद्ध का मोर्चा भी नहीं कहा जा सकता। चीन ने जिस तरह से सीमा का कायदा तोड़ा है, उसकी कीमत भी चुकानी होगी।
उन्होंने कहा कि दिलेरी में हमारे सामने चीन की सेना कहीं नही टिकती। सिंह ने कहा कि चीन अपनी फौज को पत्थर के इस्तेमाल की रणनीति सिखाकर एक अतिक्रमणकारी मुल्क की मिसाल पेश कर रहा है। एलएसी पर सैनिकों की शहादत से अब बिल्कुल अलग हालात बन गए हैं, ये भारत पर युद्ध थोपने जैसी हरकतें हैं।
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लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर पर अतुलनीय पराक्रम दिखाकर सर्वोच्च वीरता पुरस्कार पाने वाले सिंह ने कहा, भारतीय फौज के पास सबसे बड़ा हथियार उसके जवानों का हौसला और साहस है। भारत अब 1962 वाला देश भी नहीं। युद्ध किसी के हित में नहीं है, लेकिन ऐसा ही चलता रहा तो चीन के सारे मुगालते भी दूर कर दिए जाएंगे। सरकार को इस पर सूझबूझ से काम लेना होगा।