हुर्रियत कान्फ्रेंस भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की मजबूती के लिए किसी भी पहल का समर्थन करेगी। हालांकि, अलगाववादी संगठन का मानना है कि यदि दोनों देशों ने कश्मीर मुद्दे की अनदेखी की तो उनके संबंध आगे नहीं बढ़ेंगे। इस समस्या का निश्चित समय सीमा के भीतर हल निकलना चाहिए।
कान्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाक समकक्ष नवाज शरीफ के बीच बातचीत से कश्मीर मसले के बाहर रहने पर नाखुशी जाहिर की है। फारूक के अनुसार कश्मीर ही मुख्य मुद्दा है। 26/11 और समझौता ब्लास्ट जैसे मामले मुख्य नहीं हैं।
फारूक ने इस संदर्भ में विशेष तौर पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। कहा कि उन्हें अगले चुनाव को देखते हुए केवल राजनीतिज्ञ ही नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के हित में स्टेट्समैन की तरह काम करना चाहिए।
अलगाववादी नेता ने दोनों देशों से एलओसी पर संयम बरतने का आग्रह किया है। सीमा पर आम आदमी मर रहा है। इससे विस्थापन भी हो रहा है।