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आजाद को झटका, निर्दलीय विधायकों की तिकड़ी बिखरी

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राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस का गठबंधन की निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों पर पकड़ ढ़ीली पड़ने लगी है।
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने व्यक्तिगत रूप से पहल कर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को आजाद के समर्थन के लिए सहमत कर लिया, लेकिन निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों के बदलते तेवर ने तमाम समीकरण उलट-पुलट कर दिए हैं।

कांग्रेस ने सीपीएम विधायक एम वाई तारिगामी के माध्यम से विधायकों की तिकड़ी अपने पक्ष में तैयार की थी। पीडीपी की सेंध के बाद यह तिकड़ी बिखरती नजर आ रही है। इससे आजाद को झटका लगा है।
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विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमर ने हर बार ट्वीट कर बताया कि उनके पास नेकां के 15 विधायकों के अलावा दो निर्दलीय विधायक भी हैं। उमर ने दावा किया था कि उधमपुर से निर्दलीय पवन गुप्ता और झंस्कार से बकीर रिजवी उनकी पार्टी के समर्थन से जीते हैं।

15 प्लस 2 का आंकड़ा गड़बडाया

इस तरह 15 प्लस 2 बताते हुए वह अपने विधायकों का आंकड़ा हमेशा 17 गिनाते रहे। उधमपुर के निर्दलीय विधायक पवन गुप्ता अब भाजपा के साथ हैं। दरअसल वे पहले भाजपा में ही थे। टिकट नहीं मिलने पर बागी होकर चुनाव लड़े और जीते। भाजपा महासचिव राम माधव से उनकी मुलाकात हो चुकी है।

वह व्यक्तिगत रूप से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही अपना नेता मानते हैं। दूसरे निर्दलीय विधायक बकीर रिजवी खुलकर पीडीपी के खेमे में आ गए हैं। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की डिनर पार्टी में भी रिजवी शामिल हुए। इस तरह नेकां का अंकगणित फिर से 15 पर ही अटक गया है।

कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं। आजाद को प्रत्याशी बनाते समय कांग्रेस को भाजपा और पीडीपी के गठबंधन का इलहाम था। कांग्रेस ने अपने 12 विधायकों के अलावा नेकां से दो निर्दलीय समेत 17 वोट की उम्मीद की थी।

इसके अलावा सीपीएम विधायक एम वाई तारिगामी, निर्दलीय हकीम यासीन और इंजीनियर रशीद के भाजपा के प्रति विरोध को भी कांग्रेस अपने पक्ष में मान कर चल रही थी। रशीद और यासीन की सीपीएम विधायक तारिगामी के साथ तिकड़ी बनी थी। वह तिकड़ी सरकार गठन के मुद्दे पर बनी थी।

तारिगामी ने इन विधायकों के साथ संयुक्त वोटिंग की नीति बनाई जो विफल होती दिख रही है। तारिगामी ने अपना बयान जारी कर भाजपा-पीडीपी का विरोध करने का ऐलान किया है, लेकिन इसमें वह यासीन और रशीद को शामिल नहीं करा पाए।
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आजाद को जीत के लिए कम पड़ा एक वोट

निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद के करीबी लोगों का कहना है कि उनके विधानसभा क्षेत्र लंगेट के लोग चाहते हैं कि वह पीडीपी के साथ रहें। इस संबंध में उन्होंने सलाह के लिए कमेटी बनाई थी। कमेटी ने पीडीपी के साथ जाने की सलाह दी है।

पीडीएफ विधायक यासीन भी पीडीपी के विरोध से बच रहे हैं। निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों को पता है कि अगली सरकार भाजपा-पीडीपी गठबंधन की होगी। लिहाजा सरकार में ओहदा पाने का मौका भी उनके सामने हैं। आजाद को जीत के लिए कम से कम 29 वोट चाहिए लेकिन उनका आंकड़ा 28 पर अटक रहा है।

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