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जम्मू: अब जीपीएस की जगह भारतीय सैटेलाइट से मिल पाएगी कॉनवाय की जानकारी, IIT ने तैयार किया खास सिस्टम

Wed, 31 Jan 2024 12:44 PM IST
kumar गुलशन कुमार अजय मीनिया, जम्मू

सार

तैयार किए गए सिस्टम से देश में कहीं भी बैठकर कॉनवॉय की शुरुआत से गंतव्य तक पहुंचने की पल-पल की जानकारी ली जा सकेगी। काॅनवाय एक सेकेंड के लिए भी कहीं रुकी तो उसी समय पता चल जाएगा।
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आईईटी जम्मू ने तैयार किया खास उपकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईआईटी जम्मू ने सुरक्षाबलों की कॉनवॉय पर नजर रखने वाला सिस्टम तैयार कर लिया है, जिसका जम्मू-कश्मीर में इस्तेमाल किया जाएगा। इस सिस्टम से देश में कहीं भी बैठकर कॉनवॉय की शुरुआत से गंतव्य तक पहुंचने की पल-पल की जानकारी ली जा सकेगी। काॅनवाय एक सेकेंड के लिए भी कहीं रुकी तो उसी समय पता चल जाएगा। इस काॅनवाय प्रबंधन सिस्टम को लाइट हाउस नाम दिया गया है। फिलहाल सेना ने 50 उपकरण ट्रायल के लिए मांगे हैं।

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जानकारी के अनुसार पांच से छह इंच के उपकरण में तीन चीजों को मुख्य रूप से इस्तेमाल किया गया है। जिसमें नेविक रिसीवर, माइक्रोकंट्रोलर और 3जी, 4जी एवं लो पावर लांग रेंज (एलओआरए) मॉड्यूल शामिल हैं। नेविक रिसीवर से उपकरण अपने लिए लोकेशन लेता है, 3जी, 4जी एवं एलओआरए इससे जानकारी लेकर कमांडर सेंटर भेजता है, जबकि माइक्रो कंट्रोलर से उपकरण में लगे छोटे छोटे यंत्र कंट्रोल किए जाते हैं। उपकरण वाहन में कहीं भी लगाकर उसे पावर से कनेक्ट करना होता है।

जीपीएस का झंझट नहीं, भारतीय सैटेलाइट से सिग्नल

आईआईटी इलेक्टि्रकल इंजीनियर के सहायक प्रोफेसर डाॅ. अंकित दुबे ने बताया कि इस उपकरण में हम भारतीय सैटेलाइट से सिग्नल लेते हैं। इससे हम जीपीएस पर निर्भर नहीं है। यदि जीपीएस बंद भी कर दिया जाए तो हम अपनी लोकेशन भारतीय सैटेलाइट से ले सकते हैं। यह एक पोर्टेबल उपकरण है। जिसे एक वाहन से उतारकर दूसरे वाहन में लगाया जा सकता है। इसमें एक बैटरी भी है, जो दो घंटे में चार्ज होने पर 10 घंटे तक चलेगी।

बिना इंटरनेट भी 20 किलोमीटर तक निगरानी

इस उपकरण के साथ एक अन्य उपकरण भी तैयार किया गया है। जो साथ में जोड़ने से 20 किलोमीटर दूर बिना इंटरनेट के वाहन की जानकारी देगा। जिस जगह इंटरनेट होगा। वहां उपकरण को एक दूसरे के साथ कनेक्ट कर दिया जाएगा। यदि रास्ते में कहीं इंटरनेट नहीं भी होगा तो 20 किलोमीटर दूर तक उपकरण से नेटवर्क जाता रहेगा।
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कैसे मिलेगी जानकारी

इस उपकरण की जानकारी के लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इस सॉफ्टवेयर को लैपटॉप, मोबाइल और डेस्कटॉप में अपलोड करना होगा। सॉफ्टवेयर के लिए एक लॉगइन आईडी होगी, जिसके एंटी हैकिंग पासवर्ड दिया जाएगा। इस सॉफ्टवेयर की मदद से देश में कहीं भी बैठकर वाहन में लगे उपकरण की जानकारी ली जा सकेगी। यदि एक सेकेंड भी कहीं वाहन रुकेगा तो मोबाइल में सिग्नल मिल जाएगा कि वाहन किस जगह रुका है।
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