सर्दियों की दस्तक के साथ रन द वाटर स्कीम पर चल रही परियोजनाओं में बिजली उत्पादन गिरने की आशंका भी बढ़ गई है। रियासत में एनएचपीसी की सलाल पनबिजली परियोजना, रियासत की बगलिहार परियोजना समेत चिनाब दरिया पर चल रहीं पनबिजली परियोजनाओं में सर्दियों पनबिजली उत्पादन गिरता चल जाता है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिंधु जल समझौते के तहत चिनाब दरिया में पनबिजली परियोजनाओं को रन द वाटर स्कीम के तहत बनाया गया है। इसमें डैम में एक हद तक ही पानी का स्टोरेज किया जा सकता है।
इसलिए पनबिजली परियोजनाओं में सर्दियों के मौसम में बिजली उत्पादन गिरकर लगभग आधा रह जाता है। सर्दियों में बिजली संकट बढ़ने पर पहले पंपोर में 175 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता की गैस टरबाइन का प्रयोग किया जाता था, लेकिन तीन सालों से गैस टरबाइन से बिजली उत्पादन लगभग न के बराबर है।
नाम न छापने की तर्ज पर बिजली अधिकारियों ने बताया कि गैस टरबाइन की खराब पड़ी मशीनरी तक को दुरुस्त नहीं किया गया है। ऐसे में संकट के समय गैस टरबाइन का इस साल प्रयोग हो इस पर संशय बना हुआ है।