कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की अचानक नजरबंदी, गिरफ्तारी और फिर रिहाई के पीछे हुर्रियत के सबसे वरिष्ठ नेता सैयद अली शाह गिलानी की पहले ‘न’ और बाद में ‘हां’ की कहानी छिपी हुई है।
दरअसल, गिलानी ने पहले भारत सरकार के आग्रह को मानते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज से मिलने से मना कर दिया था।
मगर बुधवार देर रात गिलानी ने रुख में बदलाव करते हुए एनएसए स्तर की वार्ता से पहले ही सरताज के साथ बैठक के लिए तैयार हो गए।
इस आशय की सूचना मिलते ही अचानक सक्रिय हुई सरकार ने पहले से नजरबंद गिलानी पर सख्ती बढ़ाई तो अन्य अलगाववादी नेताओं को तत्काल नजरबंद कर दिया।