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मरीजों के नाश्ते पर एक बार फिर संकट

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जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में मरीजों के नाश्ते पर संकट खड़ा हो गया है। ठेकेदारों ने परचेज कमेटी के सदस्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए आगामी तीस मई तक का अल्टीमेटम दिया है। पहली जून से शहर के सभी प्रमुख अस्पतालों में मरीजों को सुबह का नि:शुल्क नाश्ता नसीब नहीं हो पाएगा।
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इससे जीएमसी, एसएमजीएस, सीडी, साइक्रेटरी अस्पताल के अलावा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रोजाना 1100-1200 के बीच इंडोर मरीजों को प्रभावित होना पड़ेगा। जीएमसी प्रशासन पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है। डाइट के लिए देनदारी में सबसे ज्यादा गवर्नमेंट मेडिकल कालेज जम्मू (जीएमसी) पर साठ लाख से अधिक की देनदारी बकाया है।

शहर के दूसरे बड़े जच्चा-बच्चा अस्पताल एसएमजीएस पर करीब साठ लाख, सीडी पर 36 लाख से अधिक, साइक्रेटरी पर दस लाख से अधिक और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल 13 लाख रुपये से ज्यादा की देनदारी है।
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नाश्ता ही नहीं डाइट भी होगी बंद

स्वास्थ्य विभाग के आयुर्वेदिक अस्पताल जम्मू, गांधीनगर और सरवाल अस्पतालों पर भी लाखों रुपये की देनदारी है। इन अस्पतालों से कई माह से डाइट का भुगतान नहीं हो पाया है। अगर पहली जून से मरीजों को नाश्ता बंद किया जाता है, तो उन्हें सुबह नाश्ते में अस्पतालों से नि:शुल्क आधा लीटर दूध, चीनी का पाउच, चार ब्रेड पीस नहीं मिल पाएंगे।

ठेकेदारों ने जल्द भुगतान न करने की सूरत में डाइट को पूरी तरह से बंद करने का भी प्रावधान रखा है। डाइट में दोपहर को एक दाल, सब्जी, चार चपाती, चावल तथा रात को चावल, चार चपाती और एक सब्जी दी जाती है। हफ्ते में दो दिन पनीर की सब्जी भी दी जाती है। इसमें औसतन प्रति मरीज पर एक दिन की डाइट पर साठ रुपये खर्च आता है।

ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न होने से बाजार का कर्ज बढ़ने के कारण डाइट सेवा को चलाना मुश्किल हो रहा है। नवंबर 2014 में भी ठेकेदारों ने एसोसिएटेड अस्पतालों की डाइट पर ताला लगा दिया था।
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ये अस्पताल ज्यादा प्रभावित होंगे

वैकल्पिक व्यवस्था पर काम होगा: आयुक्त सचिव
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के आयुक्त सचिव शांतमनु का कहना है कि फंड शीघ्र जारी होने पर डाइट का भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन डाइट बंद करने की सूरत मरीजों की सहूलियत के लिए अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी काम किया जाएगा।
 
बिना कैंटीन वाले अस्पताल ज्यादा प्रभावित होंगे
पहली जून से अगर मरीजों के नाश्ते पर ताला लगता है तो बिना कैंटीन सुविधा के चल रहे अस्पतालों में मरीजों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। इसमें सुपर स्पेशलिटी, सीडी, साइक्रेटरी अस्पताल शामिल हैं। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में छह यूनिट चल रहे हैं। यहां रोजाना दर्जनों मरीजों की सर्जरी हो रही है। इंडोर वार्ड भी चल रहे हैं, लेकिन कैंटीन की अभी तक कोई सुविधा नहीं है। सीडी अस्पताल में भी कई इंडोर वार्डों में बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज चलता है।
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