विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर एक अक्तूबर को आ रहे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नजर एलओसी से सटे चार जिलों की 18 लाख से अधिक मतदाताओं पर है। राजोरी, पुंछ के अलावा उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती इलाके बारामुला व कुपवाड़ा के रहने वाले मतदाताओं को साधने की उनकी कोशिश रहेगी।
पहाड़ी समुदाय अनुसूचित जनजाति का दर्जा पाने के लिए तीन दशक से अधिक समय से संघर्ष कर रहा है। आंदोलन से जुड़े एहसान मिर्जा, नितन शर्मा व नदीम खान का कहना है कि 1989 से लगातार पहाड़ी समुदाय हक की लड़ाई लड़ रहा है। उम्मीद है कि अमित शाह अपने दौरे में उनके आंदोलन का प्रतिफल देने की घोषणा करेंगे।
अब भी लगातार बैठकें कर समुदाय के लोगों को एकजुट किया जा रहा है। शाह ने अपने पिछले साल अक्तूबर में दौरे में जम्मू में आयोजित सभा में कहा था कि आने वाले समय में पहाड़ी भी प्रदेश का मुख्यमंत्री हो सकता है। आखिर क्यों नहीं हो सकता। उस समय से अब तक पहाड़ियों को आस है कि जल्द ही उनका संघर्ष रंग लाएगा। नितन का कहना है कि अब भी राज्य स्तर पर पहाड़ियों को चार प्रतिशत का आरक्षण भी 2018 में मिला था। आठ लाख आय का बैरियर भी है।