जम्मू, कश्मीर लद्दाख आल डिपार्टमेंट क्लेरिकल स्टाफ एसोसिएशन की जम्मू संभाग में गर्मियों में कार्यालयों के खुलने के समय आठ से दस बजे किए जाने के आदेश को निरस्त करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक आदेश पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट की जम्मू विंग के न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर ने याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट बीएस सलाथिया, एडवोकेट अंचित शर्मा, राकेश मन्हास, भानु सिंह सलाथिया की दलीलों व सरकार की तरफ वरिष्ठ अतिरिक्त एडवोकेट जनरल सीमा शेखर का पक्ष सुनने के बाद राज्य सरकार को अन्य को नोटिस जारी कर उन्हें एक सप्ताह का समय अपनी आपत्तियां दर्ज करवाने के लिए दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट बीएस सलाथिया ने कहा कि सरकार ने साल 1985 में आदेश संख्या 10 जीएडी को एक जनवरी को जारी किया था। इसमें राज्य में सरकारी विभागों के वर्किंग घंटों का पूरा उल्लेख था।
जम्मू डिवीजन में एक मई से तीन सितंबर तक कार्यालय खुलने का समय सुबह आठ बजे और बंद होने का समय दोपहर डेढ़ बजे का था और एक अक्तूबर से तीस अप्रैल तक सुबह दस से सायं चार बजे तक का। उन्होंने कहा कि मंडलायुक्त जम्मू ने 17 अप्रैल 2017 को आदेश जारी कर कार्यालय खुलने का समय जम्मू में सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक का किया है।
सरकारी विभागों ने जारी किए हैं शेड्यूल
अदालत ने लगाई रोक
- फोटो : फाइल फोटो
वहीं बिजली विभाग की ईएमएंडआर्रई विंग जम्मूू के चीफ इंजीनियर ने चार मई 2017 को आदेश जारी कर कार्यालय खुलने का समय सुबह दस से सायं चार बजे तक का किया है। वन विभाग के चीफ कंजरवेटर ने तीन मई 2017 को आदेश जारी है। इसी तरह का आदेश समाज कल्याण विभाग जम्मू के निदेशक ने भी नौ मई 2017 को जारी किया है। जिला उपायुक्त ने भी दो मई को ऐसा ही आदेश जारी किया है।
जस्टिस डीएस ठाकुर ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों का पक्ष सुनने के बाद कहा कि चीफ इंजीनियर, चीफ कंजरवेटर, समाज कल्याण विभाग और अतिरिक्त जिला उपायुक्त जम्मू समय शेड्यूल को निर्धारित करने के लिए कोई अधिकृत अधिकारी नहीं हैं जोकि 1985 के निर्धारित शेड्यूल को बदल सकें। उन्होंने कहा कि मामला विचाराधीन है और सीनियर अतिरिक्त एडवोकेट जनरल सीमा शेखर को कहा गया कि वह जांच करें कि सरकारी आदेश एक जनवरी 1985 को वापस लिया गया है या इसमें संशोधन हुआ है। एक घंटे के बाद सीनियर अतिरिक्त एडवोकेट जनरल सीमा शेखर ने कोर्ट को बताया कि संबंधित विषय पर वह संबंधित अधिकारियों से जरूरी साक्ष्य हासिल करने में नाकाम रही है।
इसके बाद जस्टिस डीएस ठाकुर ने कहा कि अपने कर्मचारियों के लिए समय सारिणी को निर्धारित करना सरकार के क्षेत्राधिकार में है। इसमें कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता, लेकिन सुबह आठ से दो बजे तक समय सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक से बेहतर है। बहरहाल एक जनवरी 1985 को सरकारी आदेश को अलग कर अधिकारी अपने तरीके से स्वतंत्र होकर समय सारिणी तय नहीं कर सकते है। ऐसे में अगली सुनवाई तक समय सारिणी को सुबह दस से शाम चार बजे तक करने के आदेश पर रोक लगाई जाती है। न्यायाधीश ने हालांकि स्पष्ट किया कि सरकार अगर जरूरी है तो 1985 में जारी हुए आदेश में संशोधन या अन्य कोई समय सारिणी तय करने का आदेश पारित कर सकती है।