अदालत ने कहा, यदि गुरुवार से तीन सप्ताह की अवधि के भीतर रिपोर्ट दायर नहीं की जाती है, तो दोनों अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होंगे और सीमांकन पूरा नहीं करने के कारणों की व्याख्या करेंगे।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उच्च न्यायालय ने सिंधु नदी के सीमांकन संबंधी रिपोर्ट तीन सप्ताह में पेश करने के लिए कहा है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि तय समय में रिपोर्ट दाखिल नहीं हो पाती है तो राजस्व के साथ-साथ सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के सचिव व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बताएंगे कि सीमांकन तय समय में क्यों नहीं हुआ।
विज्ञापन
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति संजय धर की खंडपीठ ने राजस्व सचिवों के साथ-साथ सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग को एक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि अब तक सीमांकन के लिए क्या किया गया। नदी का सीमांकन और इसे पूरा करने के लिए कितना समय प्रस्तावित किया गया था।
यह भी पढ़ें- ऑपरेशन भाटादूड़ियां: दो बॉक्स में आईईडी बरामद, आतंकियों पर बरसाए जा रहे आग के गोले, देखें तस्वीरें
विज्ञापन
न्याय मित्र द्वारा प्रस्तुत विभिन्न सुझावों के संबंध में, अदालत ने कहा कि अतिरिक्त महाधिवक्ता एमए चाशू तीन सप्ताह की अवधि के भीतर जवाब दाखिल कर सकते हैं इससे ज्यादा अब और समय नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने अधिवक्ता जनरल को निर्देश दिया जाता है कि वे अधिकारियों की बैठक बुलाने के संबंध में 11 अगस्त 2021 के आदेश में निहित निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें और अगली तारीख को उस पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
गांदरबल डीसी से जवाब मांगा
इस बीच अदालत ने गांदरबल जिले के सोनमर्ग में अपने होटल स्नो लैंड के लिए एक इनडोर स्विमिंग पूल, व्यायामशाला और एसपीए के निर्माण की अनुमति के संबंध में फारूक अहमद हाफिज द्वारा दायर एक आवेदन पर डिप्टी कमिश्नर गांदरबल से जवाब मांगा।