पारा लुढ़कने के साथ ही दिल पर हमले तेज हो गए हैं। कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए कोयला और लकड़ी की आग सेंकने का शौक महंगा पड़ सकता है। इसमें अधिक धूम्रपान से शरीर के भीतर गर्मी का अहसास पाने वाले भी चपेट में आ रहे हैं। पारा गिरने के साथ जीएमसी में पहुंचने वाले हार्ट अटैक के मामलों में दोगुनी बढ़ोतरी हो गई है। इसमें पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लोग ज्यादा प्रभावित हैं।
उल्लेखनीय है कि गत दिनों श्रीनगर में एक बंद कमरे में जहरीली गैस से दंपति की मौत हो गई थी। सर्दी से बचने के लिए कमरे में बड़ी कांगड़ी में आग लगाई गई थी। ताजा मामलों में वीरवार को बांडीपोरा के निर्दलीय प्रत्याशी और अंबफला जेल में एक कैदी की हार्ट अटैक से मौत हो गई।
जीएमसी के कार्डियोलाजी विभाग के एचओडी डा. सुशील शर्मा के अनुसार तापमान गिरने के साथ यूनिट में पहुंचने वाले हार्ट अटैक के मामलों में यकायक दोगुनी वृद्धि हो गई है। रोजाना 10-12 ऐसे मामले पहुंच रहे हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में आग से बचने के लिए लोग कोयला और लकड़ी की आग से सेंक लेने को ज्यादा तवज्जो देते हैं, लेकिन इस आग के साथ निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनोआक्साइड सहित कई जहरीली गैसें शरीर के भीतर जाकर हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार रहती हैं। अधिक ठंड में शारीरिक गतिविधियां कम होने से खून में कंपोनेंट आपस में जुड़कर सीधे दिल पर हमला करते हैं।
इससे खून की सप्लाई प्रभावित होने से हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। मोटापा, तनाव, ब्लड प्रेशर भी हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार हैं। अमूमन 40 की उम्र में होने वाले हार्ट अटैक की गिरफ्त में अब 20 साल के युवा आ रहे हैं। इसमें अधिकांश मामलों में पुरुष पीड़ित हैं। सर्दी के सीजन में अधिकांश लोगों में ब्लड प्रेशर की शिकायत बढ़ गई है। शहरी इलाकों के साथ संभाग के दूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में डोडा, किश्तवाड़, रामबन, राजोरी, पुंछ इलाकों से मामले जीएमसी पहुंच रहे हैं।