सांबा। जिला अस्पताल में नई इमारतें तो बनाई जा रही हैं, लेकिन मरीजों के लिए आज भी सुविधाओं का टोटा है। सरकारी अस्पतालों में तैनात कुछ डॉक्टर निजी तौर पर फीस लेकर ही मरीजों की जांच कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को सरकारी अस्पताल में सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।
पार्षद रवि खजूरिया, सुमित सिंह सप्पन, समाजसेवी गंभीर सिंह, सुरेश शर्मा आदि ने बताया कि जिला अस्पताल तो रेफर अस्पताल बन गया है। छोटी से बीमारी हो या हादसा होने पर घायल को जम्मू रैफर कर दिया जाता है। उनके अनुसार करोड़ों रुपये की मशीनें अस्पताल में लगाई गई हैं, फिर भी मरीज को जम्मू भेजा जाता है। सरकार की ओर से अस्पताल में बड़ी-बड़ी इमारतें तो बनाई जा रही हैं, लेकिन मरीजों को सुविधाओं का अभाव है। कुछ डॉक्टरों को छोड़ कर अन्य प्राइवेट प्रैक्टिस की ओर अधिक रुझान रखते हैं। ऐसे में आम मरीजों को सरकारी सुविधाएं कैसे मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में 300 से अधिक हर रोज ओपीडी होती है। ऐसे में छोटी सी बीमारी होने पर जम्मू रैफर करना भी सही नहीं है। उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन तक की सुविधा है फिर भी मरीज को रेफर कर दिया जाता है।
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जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन चालू है। केवल गंभीर बीमारी वाले मरीज अथवा हादसा होने पर सिर को चोट आने वाले मरीज को जम्मू रेफर करना पड़ता है। क्योंकि कई बार आपरेशन की नौबत आती है। ऐसे में जम्मू में ही डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि रेफर के बजाय जिला अस्पताल में ही मरीज का उपचार किया जाए।
-डॉ. विनोद शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल, सांबा।