फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक ही अस्पताल में दो नियम

विज्ञापन
उपजिला अस्पताल आरएस पुरा मे चुर्तथ श्रेणी कर्मी डाक्टर की कार को धोते हुए - फोटो : RSPURA
विज्ञापन
आरएस पुरा। उपजिला अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले रोगियों को अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि उपजिला अस्पताल में सफाई व्यवस्था बदहाल होने पर सबसे बड़ी दिक्कत होने पर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। जिस स्थान पर एक्सरे किए जाते हैं वहां का भवन पुराना होने पर जर्जर होने के साथ गंदगी लगी होने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
विज्ञापन

नाक-कान, हड्डियों, आंखों के डॉक्टर को दिखाने के लिए कोरोना टेस्ट अनिवार्य नहीं, लेकिन गायनोलॉजिस्ट वार्ड व अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पहले कोरोना टेस्ट कराना जरूरी रखा गया है। हालत यह है कि डॉक्टरों के कमरों के बाहर नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कमी नहीं होने पर लोगों की लगी भीड़ पर नियंत्रण करना मुश्किल बन जाता है। वहां पर सुबह से बैठे रोगी को यह नहीं बताया जाता कि कोरोन टेस्ट कराना जरूरी है। जिन लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज लगवा रखी है, उन्हें भी कोरोना टेस्ट कराना पड़ता है, जो अस्पताल से काफी दूूर होने पर लोगों को वहां पर जाना पड़ता है।
पत्नी को गायनोलॉजिस्ट डॉक्टर के पास लेकर आए सतपाल ने कहा कि अगर लोगों को पहले ही सूचित किया जाए कि कोरोना टेस्ट अनिवार्य है तो लोग पहले टेस्ट करा कर आएं, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता। जब किसी रोगी का नंबर आता है तो डॉक्टर कोरोना टेस्ट कराकर आने के लिए कहते हैं। इसके चलते रोगियों का समय पर उपचार नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि रोगी की हालत खराब होने पर लोगों को पहले टेस्ट कराना पड़ता है कि इसके लिए अस्पताल में ही व्यवस्था की जानी चाहिए।
विज्ञापन

महिला अमनप्रीत का कहना है कि गायनोलॉजिस्ट डॉक्टर द्वारा महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है। अगर किसी की पर्ची पर लिखने के लिए जगह न हो ते पहले दूसरी पर्ची लेकर आने के लिए कहा जाता है। उन्होंने कहा कि अगर डॉक्टर का रवैया ठीक हो तो रोगी वैसे ही ठीक हो जाता है, लेकिन आरएस पुरा उपजिला अस्पताल में ऐसा नहीं।
एक महिला द्वारा पेट का अल्ट्रासाउंड कराने पर डॉक्टर से कहा कि उसे पथरी है वह भी देख ले डॉक्टर का कहना था कि टोगों की भी कर लेता हूं।
------
एक्सरे के लिए भवन नहीं होने पर पुराने भवन में ही कार्य चल रहा है। नए भवन का काम चल रहा है। बनने पर वहां शिफ्ट किया जाएगा। अगर कोई डॉक्टर रोगियों से सही तरह पेश नही आता तो लिखित में शिकायत करने पर कार्रवाई की जाएगी।
-सतीश कुमार, ब्लॉक मेडिकल अधिकारी
-------------
चुर्तथ श्रेणी कर्मी यहां नियुक्त डॉक्टरों की कार धोने के लिए देखे जा सकते हैं। वह वार्ड में नहीं मिल पाते। रमेश कुमार का कहना है कि यहां उपचार के लिए आने पर ओपीडी के समय कमरे के बाहर कर्मी को होना चाहिए, लेकिन डॉक्टरों द्वारा उनसे कार धुलाने का काम कराया जाता है, जिसके चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें