-दो घंटे से अधिक मोबाइल फोन देखना पड़ रहा भारी,एसएमजीएस अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ बोले
-ढाई से चार वर्ष के बीच बच्चों में दिखाई दे रहे लक्षण,ओपीडी में 10 में से तीन बच्चे पीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बदलती जीवनशैली, काम को जल्दी निपटाने की आपाधापी में माताएं छोटे बच्चों को मोबाइल फोन पकड़ाकर खुद काम में लगी रहती हैं। घंटों मोबाइल फोन पर कार्टून या गाने की धुन पर बच्चा कुछ देर के लिए अपने परिवार व खुद मां से कट जाता है। धीरे-धीरे यह आदत एक नई बीमारी को जन्म देती है जिसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का नाम दिया गया है। इसका पता तब चलता है जब बच्चा ढाई से चार वर्ष का हो जाता है। ऐसे में मोबाइल देने से बच्चों को बचने की जरूरत है।
श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) अस्पताल में रोजाना ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर बीमारी के शिकार होकर बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं। किसी में यह बीमारी प्राथमिक स्तर पर है तो कई बच्चे इससे प्रभावित नजर आ रहे हैं। नियोनेटोलॉजिस्ट डाॅ. अनुमोदन गुप्ता ने कहा कि यदि ओपीडी में 10 बच्चे दिखाने आ रहे हैं तो इनमें से तीन इस बीमारी से ग्रस्त हैं। ऐसे में अभिभावकों खास तौर पर माताओं को चाहिए कि वह घर के काम निपटाने या उनको रोते समय शांत कराने के लिए मोबाइल कदापि न दें।
इन स्थितियों में दे रहें बच्चों
को फोन तो हो जाएं सावधान
बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि इन घर पर किसी मेहमान के आने पर,बच्चा जब रो रहा हो, खाना खिलाते समय पांच माह से लेकर चार वर्ष तक के बच्चों को मोबाइल फोन की स्क्रीन दिखाना खतरनाक है। इसके लक्षण तब दिखाई देना शुरू करते हैं जब बच्चा ढाई से चार वर्ष के बीच होता है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल फोन कदापि नहीं देना चाहिए।
ऐसे लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
1: खाना खाने में आनाकानी करना
2: एकांत में रहना पसंद करना
3: पूरे दिन इधर-उधर घूमते रहना, कुछ कहने पर चिड़चिड़ाना
4: परिवार वालों से बात न करना, नींद में कमी
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ओपीडी में इन दिनों वायरल फीवर से ग्रस्त होकर बच्चे आ रहे हैं। इनके बीच में ही ऐसे बच्चे भी हैं जिनको ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर ने पूरी तरह घेर लिया है। इनके माता-पिता की काउंसलिंग की जा रही है।
डाॅ. अनुमोदन गुप्ता, नियोनेटोलॉजिस्ट, एसएमजीएस अस्पताल