जम्मू। तनाव और अवसाद के बढ़ते स्तर को देखते हुए इस साल देश व्यापी स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की ओर कदम बढ़ाया गया है। केंद्रीय बजट में इस पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, लेकिन जम्मू संभाग में स्थिति इसके विपरीत है। संभाग के दस जिलों की लाखों की आबादी के लिए चार ही मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं। मनोरोगी अस्पताल जम्मू में वर्षों से आठ संकाय के पद सृजित हैं, जिसमें वर्तमान में चार ही प्रवक्ता तैनात हैं। इन्हीं गिने-चुने डॉक्टरों के सहारे संभाग के अधिकांश मानसिक रोगी निर्भर हैं, जिससे गंभीर मरीजों को मजबूरन उपचार के लिए मीलों सफर तय करके जम्मू के मनोरोगी अस्पताल में आना पड़ रहा है।
मनोरोगी अस्पताल जम्मू में हाल ही में डीएनबी (डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड) की चार सीटें मंजूर हुई थीं, जिनमें तीन ही नियुक्तियां हुई हैं। इसमें दो पद डिप्लोमा और दो एमबीबीएस में दो से तीन साल की डिग्री प्रदान की जाती है। जम्मू में एमडी मनोरोग चिकित्सा का पद भी नहीं मिल पाया है, क्योंकि इसके लिए प्रोफेसर जरूरी है। डीपीसी का मामला न्यायालय में 2019 में हल होने के बाद आगे की कार्रवाई नहीं हुई है। जम्मू संभाग में तेजी से मानसिक समस्याओं से लोग ग्रस्त हो रहे हैं। इसमें प्रमुख रूप से तनाव और अवसाद हावी हुआ है।
30 बिस्तर पर एक मनोरोगी इकाई जरूरी
राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) के मानकों के तहत 30 बिस्तर पर एक मनोरोगी इकाई होनी चाहिए। मनोरोगी अस्पताल में 120 बिस्तर स्थापित हैं यानी यहां चार मनोरोगी इकाइयां चाहिए। प्रत्येक इकाई में एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, एक सहायक प्रोफेसर और एक लेक्चरर के साथ तीन सलाहकार होने चाहिए। इस कारण मनोरोगी अस्पताल में न्यूनतम 12 सलाहकार होने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 80 प्रतिशत रोगों में मानसिक समस्याएं हैं।
जिला स्तर पर मनोचिकित्सकों की कमी
संभाग में मनोचिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों को एक साल और तीन माह का प्राथमिक मानसिक रोगी देखभाल प्रशिक्षण दिया गया था। लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ पाया। दो साल से कोविड महामारी के कारण इस कार्यक्रम को गति नहीं मिली। जो डॉक्टर प्रशिक्षित भी किए गए थे, उनमें अधिकांश का अन्य स्थानों पर तबादला हो गया। जिसके बाद इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।
जम्मू में आठ पद और श्रीनगर में 37 पद सृजित
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में मनोरोग अस्पताल जम्मू में संकाय के आठ पद सृजित हैं। इसमें एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, दो सहायक प्रोफेसर और चार लेक्चरर हैं। वर्तमान में लेक्चरर पद पर चार ही डॉक्टर तैनात हैं, जबकि अस्थायी पदों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर के पद खाली पड़े हुए हैं। इसमें लेक्चरर पद पर डॉ. मनु अरोड़ा (इंचार्ज एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. शुभम रिवीस (इंचार्ज सहायक प्रोफेसर), डॉ. राकेश बंसल (एससी) (इंचार्ज सहायक प्रोफेसर), लेक्चरर डॉ. अभिषेक तैनात हैं। इनमें तीन को उच्च पद दिए गए हैं, लेकिन स्थायी नहीं किया गया है। जबकि मनोरोग अस्पताल श्रीनगर में कुल 37 पद सृजित हैं, इसमें पांच प्रोफेसर, सात एसोसिएट प्रोफेसर, आठ लेक्चरर और क्लीनिकल साइकोलाजिस्ट नॉन मेडिकल में दो सहायक प्रोफेसर, चार लेक्चरर, दो लेक्चरर (साइकाइटरी सोशल वर्कर) और दो लेक्चरर (साइकाइटरी नर्सिंग) के पद शामिल हैं।