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जम्मू-कश्मीर गन लाइसेंस फर्जीवाड़ा:अफसरों ने देशभर में बांट दिए गन लाइसेंस, धोनी भी कर चुके हैं आवेदन

Tue, 31 Dec 2019 11:35 AM IST
Pranjal Dixit अजय मीनिया, जम्मू

सार

  • 10 साल में 4.29 लाख लाइसेंस जारी, जम्मू-कश्मीर के लोगों के नाम महज 10 फीसदी
  • जिलों के डीसी रहते ज्यादातर आईएएस और केएएस अफसरों ने खूब की मनमानी 
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बंदूक - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
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अति संवेदनशील और आतंकवादग्रस्त जम्मू-कश्मीर में बंदूकों के लाइसेंस रेवड़ियों की तरह बाटे गए। चाहे आईएएस हो या फिर केएएस अफसर। डीसी की कुर्सी पर बैठकर लाइसेंस थोक में बेचने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। फर्जीवाड़ा इस कदर किया गया कि देशभर में चार लाख से अधिक लाइसेंस जारी हो गए। जम्मू-कश्मीर से कुल 4.29 लाख गन लाइसेंस जारी किए गए, जिनमें 90 फीसदी दूसरे राज्यों के लोगों के नाम पर हैं। 
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जानकारी के अनुसार कुपवाड़ा, बारामुला, शोपियां, राजोरी, उधमपुर, डोडा और रामबन जिले में सबसे अधिक लाइसेंस जारी किए गए हैं। जिनमें जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। अकेले डोडा, रामबन और उधमपुर जिले से ही राज्य से बाहर रहने वाले 1 लाख 32 हजार 321 लोगों को गन लाइसेंस जारी हुए हैं, जबकि कुल 1 लाख 43 हजार 13 लाइसेंस जारी हुए हैं।

कुपवाड़ा जिले में तो कोई फाइल ही नहीं मिली 
 सूत्रों का कहना है कि जब मामले की जांच शुरू हुई तो कुपवाड़ा जिले में न तो लाइसेंस की फाइल मिली, न ही कोई रजिस्टर मिला। बाहर के लोगों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस दिए गए।  
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2018 में राजस्थान की एटीएस ने किया था खुलासा, पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा ने दी थी सीबीआई जांच की मंजूरी
जम्मू-कश्मीर में फर्जी गन लाइसेंस का खुलासा राजस्थान के एंटी टेरर स्कवायड (एटीएस) ने 2018 में किया था। इसके बाद राजस्थान पुलिस ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी। 2018 में ही पूर्व राज्यपाल एनएन वोहरा ने इसकी जांच तत्कालीन विजिलेंस विभाग को दी थी। सितंबर, 2018 में जांच सीबीआई को सौंप दी गई। 

राजस्थान पुलिस ने तत्कालीन मुख्य सचिव बीबी व्यास को इस रैकेट के बारे में 2017 में सूचना दी थी। इसके लिए बाकायदा कई पत्र भी लिखे गए लेकिन कोई जवाब नहीं आया। राजस्थान एटीएस ने इस पूरे ऑपरेशन का कोड नाम जुबेदा रखा था। जांच में पाया था कि 50 से अधिक लोगों के पास मिले गन लाइसेंस जम्मू-कश्मीर से जारी हुए थे। आगे की जांच में पता चला कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह लाइसेंस लिए गए।

राजस्थान पुलिस ने उसी समय मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर दी थी। राजस्थान पुलिस द्वारा पकड़े गए 50 लोगों में से एक आईएएस अफसर का भाई भी था। राजस्थान पुलिस ने जांच में यह भी पाया कि 3367 सुरक्षाकर्मियों ने भी लाइसेंस ले रखे हैं। इसके बाद सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ आदि को राजस्थान पुलिस ने पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी और इसका जवाब मांगा था।  
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इसी साल 10 जुलाई को पड़े थे छापे
सीबीआई को जांच मिलने के बाद 10 जुलाई, 2019 को सीबीआई ने एक  साथ जम्मू, कठुआ, उधमपुर और श्रीनगर में छापेमारी की। चारोे जिलों में 11 जगहों पर छापेमारी कर सीबीआई ने कई तरह का रिकॉर्ड जब्त कर लिया। सीबीआई कई महीनों से जब्त किए गए रिकॉर्ड को खंगाल रही थी। इसी आधार पर सोमवार को सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर में 14 स्थानों पर छापे मारे। 

महेंद्र सिंह धोनी ने भी किया था आवेदन
जम्मू-कश्मीर से लाइसेंस लेना बाहर के लोगों के लिए बहुत आसान रहा है। अफसरों और गन डीलरों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस के लिए होड़ लगी रहती थी। हालांकि कई लोगों ने सही दस्तावेज पर भी लाइसेंस लिए हैं। टीम इंडिया के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी ने भी जम्मू-कश्मीर में गन लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जिनका आवेदन रद्द कर दिया गया था।  

लाइसेंस बंद, लेकिन डीलर अब भी बना रहे
पिछले साल ही जम्मू कश्मीर में गन लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी गई थी। बावजूद इसके लाइसेंस अंदर खाते बनाए जा रहे हैं। कई गन डीलर मालिकों ने इन लाइसेंसों को बनाया है। कई बाहरी लोगों को लाइसेंस दिए जा रहे हैं। 
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