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Ground Zero : जम्मू में दिन चढ़ने तक गूंजे सायरन, श्रीनगर में दोपहर होते 10 धमाके; उड़ी में बरसते रहे गोले

Sun, 11 May 2025 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा रोली खन्ना (जम्मू ), अमृतपाल सिंह बाली (श्रीनगर) और उड़ी से अजीम यूसुफ

सार

रात करीब तीन बजे जेट की गड़गड़ाहट ने लोगों को परेशान किया। लगा कि सुबह होने के साथ ये सब थम जाएगा, पर तड़के 5.30 बजे के करीब एक फिर धमाके, एयर रेड अलर्ट की सूचना ने कई आशंकाओं को जन्म दे दिया। 
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जम्मू के रिहायशी इलाकों में पाकिस्तान ने मिसाइल और ड्रोम से हमले किये। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शांत शहर जम्मू का मिजाज शनिवार की सुबह कुछ अशांत सा था। एक और रात आंखों में काटने वाले लोगों की नींद लगातार गूंजते धमाके और सायरन की आवाजों से नींद तो उड़ चुकी थी, पर सुबह इतनी बेचैनी दे जाएगी, ये किसी ने सोचा नहीं था। रात करीब तीन बजे जेट की गड़गड़ाहट ने लोगों को परेशान किया। लगा कि सुबह होने के साथ ये सब थम जाएगा, पर तड़के 5.30 बजे के करीब एक फिर धमाके, एयर रेड अलर्ट की सूचना ने कई आशंकाओं को जन्म दे दिया। 

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देखते ही देखते चारों तरफ से धमाके गूंजने लगे। जम्मू के अतिव्यस्त घनी बस्ती वाले रिहायशी इलाके रिहाड़ी, जानीपुर और रूपनगर में मकानों-कारों की क्षतिग्रस्त तस्वीरें वायरल होने लगीं। सुबह रेलवे स्टेशन पर लोगों की भीड़ दिखी। सुरक्षित स्थानों पर जाने को लेकर लोगों में चर्चाएं रहीं। इस सबके बीच पाकिस्तान के दुस्साहस के खिलाफ आक्रोश भी दिखा। 

शुक्रवार से शनिवार की सुबह तक चार बार शहर में ब्लैकआउट किया गया। रात 12 से एक बजे के बीच हुए धमाकों के बाद भोर में चार बजे तक शांति थी। पर, उसके बाद एक-एक कर धमाकों का सिलसिला शुरू हुआ, तो कभी एक बार में चार-चार तो कभी लगातार होता ही रहा। सुबह 11 बजे तक धमाकों की गूंज सुनाई देती रही। दुकानें कम खुल रही हैं। 
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माहौल के सवाल पर बलजीत मगोत्रा कहते हैं, डरना क्या है जी...ये पाकिस्तान है, इससे तो हमारी सेना निपट लेगी। बस इन्हें घुसने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। पक्का डंगा पर भी सन्नाटा पसरा था। आधी से ज्यादा दुकानें बंद थीं। पुस्तक विक्रेता राहुल महाजन कहते हैं, सुबह से जो भी खबरें मिली हैं, उसने लोगों को परेशान किया है। इसलिए लोगों ने खुद ही दुकान बंद करने का फैसला कर लिया। 

यह शहर ही सबकुछ है...यहां से जाने की सोच नहीं सकते
तमाम चिंताओं के बीच रुचिका गुप्ता की चिंता एकदम अलग है। रेजीडेंसी रोड पर उनसे मुलाकात हुई। कहती हैं कि मेरे जानने वाले कई परिवार जम्मू से चले गए। पर, ये कोई समाधान नहीं। हम तो अपना सबकुछ छोड़कर और लेकर शादी के बाद यहां आकर बस गए। यह शहर हमारा सबकुछ है। रुचिका कहती हैं, जो कुछ हो रहा है, उसके पल-पल के गवाह हैं हम लोग। पर कुछ पाकिस्तान का प्रोपेगंडा भी है, झूठी खबरों से बचने की जरूरत है। वरना पैनिक बढ़ेगा।

युवा बोले-बहुत समझा लिया, अब सबक सिखा दो
एक तरफ धमाके लोगों को डरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ युवाओं का गुस्सा इस वक्त एकदम उफान पर है। कच्ची छावनी से गुजरते वक्त हमें अमित साम्याल मिले। उन्हें अपने क्लाइंट से मिलने जाने की जल्दी थी। पर, देश की बात पर बिना कहे वे आगे नहीं बढ़ते। कहते हैं कि पहलगाम-बायसरन के बाद समझाने को कुछ बचता नहीं है, हम चाहते हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए।
 

श्रीनगर में दोपहर तक दस धमाके, सभी हमले नाकाम

जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी शनिवार सुबह अंगड़ाई ले ही रही थी कि धमाकों ने शांत माहौल में बेचैनी बढ़ा दी। कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की बातें वायरल होने लगीं।

पौने बारह बजे तक एक के बाद एक दस धमाके हुए। दोपहर तक स्थिति साफ हुई कि सारे हमलों को नाकाम कर दिया गया, तो लोगों ने राहत की सांस ली। पहला धमाका सुबह करीब 5:30 बजे हुआ।

इसके बाद एक घंटे के अंदर सात और धमाकों की आवाजों से शहर गूंजता रहा। करीब पौने बारह बजे लगातार दो और धमाके सुने गए। अलूचीबाग निवासी मोहिंदर सिंह बताते हैं कि धमाके सुनकर परिवार हड़बड़ाकर उठा।

सुरक्षा के लिए ग्राउंड फ्लोर पर आ गया। वह कहते हैं, फिल्मों में ऐसे दृश्य देखने को मिले थे और आज वास्तविक जिंदगी में अनुभव हो रहा है। धमाकों के बाद पैदा हुए माहौल की वजह से श्रीनगर शहर में आधी से ज्यादा दुकानें खुली ही नहीं। सड़कों पर चहल-पहल भी कम रही। लोगों में हमलों के लेकर पाकिस्तान के प्रति गुस्सा दिखा। उनका कहना था पाकिस्तान को हर हमले पर सबक मिल रहा है।
 
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बारामुला के उड़ी सेक्टर में रिहायशी इलाकों में बरस रहे गोले, छोड़ा घर

बारामुला के उड़ी सेक्टर के सलामाबाद, चुरुंडा, सिलिकूट आदि क्षेत्रों में शाम 6 बजे से शुरू हुई गोलाबारी शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक जारी रही। हमले में कई मकान, दुकान और निर्माण क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

ज्यादातर लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं। जो घर छोड़कर नहीं गए, उनके दिन भी बंकरों में कट रहे हैं। मवेशियों को चारा देने या बेहद जरूरी काम पर ही लोग बाहर निकल रहे हैं।

सलामाबाद के नदीम अकबर खान बताते हैं कि सारी रात धमाके होते रहे हैं। हम देखभाल के लिए यहां रुके हैं। परिवार को भी बारामुला भेज दिया है। वहीं, सुरक्षित ठिकाने की ओर नहीं जाने के सवाल पर फारूख अहमद शेख कहते हैं, घर छोड़कर कहां जाएं। रात बंकर में कटती है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि अधिकतर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कुछ लोग रह गए हैं। हालात पर नजर रखी जा रही है। गोलाबारी में काफी इमारतों और वाहनों को नुकसान पहुंचा है। कुछ पशु भी मारे गए हैं। 
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