शांत शहर जम्मू का मिजाज शनिवार की सुबह कुछ अशांत सा था। एक और रात आंखों में काटने वाले लोगों की नींद लगातार गूंजते धमाके और सायरन की आवाजों से नींद तो उड़ चुकी थी, पर सुबह इतनी बेचैनी दे जाएगी, ये किसी ने सोचा नहीं था। रात करीब तीन बजे जेट की गड़गड़ाहट ने लोगों को परेशान किया। लगा कि सुबह होने के साथ ये सब थम जाएगा, पर तड़के 5.30 बजे के करीब एक फिर धमाके, एयर रेड अलर्ट की सूचना ने कई आशंकाओं को जन्म दे दिया।
देखते ही देखते चारों तरफ से धमाके गूंजने लगे। जम्मू के अतिव्यस्त घनी बस्ती वाले रिहायशी इलाके रिहाड़ी, जानीपुर और रूपनगर में मकानों-कारों की क्षतिग्रस्त तस्वीरें वायरल होने लगीं। सुबह रेलवे स्टेशन पर लोगों की भीड़ दिखी। सुरक्षित स्थानों पर जाने को लेकर लोगों में चर्चाएं रहीं। इस सबके बीच पाकिस्तान के दुस्साहस के खिलाफ आक्रोश भी दिखा।
शुक्रवार से शनिवार की सुबह तक चार बार शहर में ब्लैकआउट किया गया। रात 12 से एक बजे के बीच हुए धमाकों के बाद भोर में चार बजे तक शांति थी। पर, उसके बाद एक-एक कर धमाकों का सिलसिला शुरू हुआ, तो कभी एक बार में चार-चार तो कभी लगातार होता ही रहा। सुबह 11 बजे तक धमाकों की गूंज सुनाई देती रही। दुकानें कम खुल रही हैं।
माहौल के सवाल पर बलजीत मगोत्रा कहते हैं, डरना क्या है जी...ये पाकिस्तान है, इससे तो हमारी सेना निपट लेगी। बस इन्हें घुसने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। पक्का डंगा पर भी सन्नाटा पसरा था। आधी से ज्यादा दुकानें बंद थीं। पुस्तक विक्रेता राहुल महाजन कहते हैं, सुबह से जो भी खबरें मिली हैं, उसने लोगों को परेशान किया है। इसलिए लोगों ने खुद ही दुकान बंद करने का फैसला कर लिया।
यह शहर ही सबकुछ है...यहां से जाने की सोच नहीं सकते
तमाम चिंताओं के बीच रुचिका गुप्ता की चिंता एकदम अलग है। रेजीडेंसी रोड पर उनसे मुलाकात हुई। कहती हैं कि मेरे जानने वाले कई परिवार जम्मू से चले गए। पर, ये कोई समाधान नहीं। हम तो अपना सबकुछ छोड़कर और लेकर शादी के बाद यहां आकर बस गए। यह शहर हमारा सबकुछ है। रुचिका कहती हैं, जो कुछ हो रहा है, उसके पल-पल के गवाह हैं हम लोग। पर कुछ पाकिस्तान का प्रोपेगंडा भी है, झूठी खबरों से बचने की जरूरत है। वरना पैनिक बढ़ेगा।
युवा बोले-बहुत समझा लिया, अब सबक सिखा दो
एक तरफ धमाके लोगों को डरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ युवाओं का गुस्सा इस वक्त एकदम उफान पर है। कच्ची छावनी से गुजरते वक्त हमें अमित साम्याल मिले। उन्हें अपने क्लाइंट से मिलने जाने की जल्दी थी। पर, देश की बात पर बिना कहे वे आगे नहीं बढ़ते। कहते हैं कि पहलगाम-बायसरन के बाद समझाने को कुछ बचता नहीं है, हम चाहते हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए।