कटड़ा का क्षेत्र जम्मू लोकसभा क्षेत्र में आता है। लगभग साढ़े 17 लाख वोटर वाले इस क्षेत्र में भाजपा से लगातार तीसरी बार जुगल किशोर शर्मा, कांग्रेस से रमन भल्ला सहित 22 प्रत्याशी मैदान में हैं। पिछले चुनाव में जुगल किशोर ने रमण भल्ला को ही हराया था। इस लोकसभा क्षेत्र में चार जिलों की 18 विधानसभाएं आती हैं। इस लोकसभा में जम्मू के अलावा रियासी, सांबा ओर राजौरी जिले का सुंदरबनी से जुड़ा इलाका आता है।
पिछले कुछ समय से जम्मू और इसके आसपास का क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ बन गया है। यहां प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता स्थानीय सांसद से हुई नाखुशी को कम कर देती है। क्षेत्र में पंजाबी समुदाय की स्थिति भी मजबूत है। ऐसे में कांग्रेस के रमण भल्ला लगातार दूसरी बार जुगल किशोर के सामने चुनौती पेश कर रहे हैं। हालांकि स्थानीय जानकारों का मानना है कि पहाड़ों से घिरे इलाकों में यह चुनौती भी किसी पहाड़ से कम नहीं है। कांग्रेस राज्य में चुनाव न होने से विकास के अटकने को मुद्दा बना रही है, तो भाजपाइयों का कहना है कि केंद्र ने इस क्षेत्र के विकास के लिए खजाना खोला है। सड़कों पर सबसे ज्यादा काम हुआ है।
अनुच्छेद-370 पर बंटे जल्द चुनाव की मांग
संसदीय क्षेत्र के लोगों की मांग है कि राज्य के चुनाव भी जल्द होने चाहिए। भांबला के हार्डवेयर व्यापारी राजेंद्र शर्मा का कहना है, देश तो आगे बढ़ा है लेकिन स्थानीय मुद्दों पर भी बात होनी चाहिए। राज्य में चुनाव होने से विकास तेज हो सकेगा। युवा विरेंद्र बनौठिया का मानना है कि आरक्षण की नई बनी स्थिति में अनुच्छेद-370 के बाद विशेष कोटा कश्मीर का ज्यादा बढ़ा है, जम्मू का नहीं। हालांकि वह इस बारे में ज्यादा स्पष्ट नहीं कर सके, लेकिन इस बात पर अड़े रहे कि उन्हें इसका कोई लाभ नहीं होगा। साथ ही यह डर भी दिखा कि बाहर के लोग यहां आकर बस जाएंगे। रियासी के विनय ऐसा नहीं मानते हैं। कहते हैं, कुछ लोग भविष्य की बड़ी तस्वीर नहीं देख रहे हैं। छोटे लालच और कुछ लोगों के बहकावे में आकर ऐसा कह रहे हैं। उनका मानना है कि अब खुला माहौल होने के कारण यहां पर उद्योग-धंधे बढ़ेंगे। टैक्सी चालक राजू शर्मा का कहना है कि नशीले पदार्थों का कारोबार भी यहां तेजी से बढ़ रहा है।
पर्यटन के नक्शे पर कश्मीर की तरह न आने का दर्द
माता वैष्णो देवी और अन्य धार्मिक केंद्रों के कारण जम्मू में धार्मिक पर्यटन तो बढ़ा, लेकिन लोगों को यह दर्द भी है कि यहां की खूबसूरती को कश्मीर के मुकाबले कमतर दिखाया गया। जम्मू को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है। एयरपोर्ट से कुछ दूर निकलते ही मोबाइल शॉप चलाने वाले विशाल कहते हैं, लोग कश्मीर तो जाते हैं, लेकिन यहां भी आना चाहिए। इससे यहां रोजगार और कारोबार दोनों बढ़ेगा। यह बात और है कि चुनाव में वह पिछली बार की तरह ही रहना चाहते हैं। अखनूर के टांडा में सब्जी बेचने वाले विशाल युवा हैं। बिजली न आने जैसी कई समस्याएं गिनाते हैं। कहते हैं, रोजगार के अवसर बढ़ने चाहिए। वह भी यहां पर्यटन के क्षेत्र में ज्यादा संभावनाएं मानते हैं।
रियासी के पार्क में चौपाल
रियासी जिला इस लोकसभा क्षेत्र के लिए काफी अहम है। इसे जिला बनाने के लिए 90 के दौर में शहरवासियों ने लगातार बाजार बंद कर 72 दिन का आंदोलन चलाया था। बस अड्डे के पास ही होटल चलाने वाले विवेक शर्मा कहते हैं, हमने अपने सांसद को तो नहीं देखा, लेकिन यह वक्त देश के लिए वोट करने का है। दुनिया में देश का नाम बढ़ा है। पास में खड़े जितेंद्र भी हां में हां मिलाते हैं। शहर के बीचों-बीच पार्क में स्थानीय लोगों की एक चौपाल सी लगी है। पूर्व पार्षद जहांआरा कहती हैं, चुनाव में मुद्दों पर बात होनी चाहिए। रोजगार और महंगाई पर कोई बात नहीं कर रहा है। सुदेश पंडोत्रा कहते हैं, महंगाई तो वक्त के साथ घटती-बढ़ती रहती है, लेकिन देशहित से समझौता नहीं किया जा सकता। बुजुर्ग सुखदेव सिंह कहते हैं कि नेताओं ने जो वादे किए वो निभाएं नहीं। वहीं, ब्रजमोहन का कहना है कि देश की छवि दुनिया में मजबूत हुई है। बिशन मंगोत्रा ने भी स्थानीय स्तर पर वादों के पूरा न होने का मुद्दा उठाया तो पास में बैठे दो बुजुर्ग टोकते हुए कहते हैं कि यह बड़ा चुनाव है और देश की सरकार सही काम कर रही है।