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संप्रभुता के मामले पर पुनर्विचार याचिका न करने वाले वकील से सरकार ने जबरन लिया इस्तीफा

Sat, 11 Feb 2017 07:30 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
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महबूबा मुफ्ती - फोटो : File Photo
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जम्मू-कश्मीर की संप्रभुता को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के मामले में पुनर्समीक्षा याचिका दायर करने से इनकार करने पर राज्य सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल सुनील फर्नांडीस से जबरन इस्तीफा ले लिया गया है। सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से पुनर्समीक्षा के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। इससे इनकार करने पर उनसे सोमवार को इस्तीफा मांग लिया गया। 
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सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर के आदेश में जम्मू-कश्मीर की भारतीय संविधान के दायरे से बाहर किसी भी संप्रभुता के दावे को खारिज कर दिया था। इस मामले पर सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्समीक्षा याचिका दायर करने का दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन स्टैंडिंग काउंसिल ने दलीलों के अभाव का तर्क देकर याचिका दायर करने से साफ इनकार कर दिया।

बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा संबंधी याचिका को लेकर बनाए जा रहे दबाव पर एडवोकेट फर्नांडीस ने सरकार से लिखित में विशेष निर्देश देने की बात कही थी। साथ ही यह भी कहा था कि वे पुनर्समीक्षा याचिका में इस बात का जिक्र भी करेंगे कि सरकार के निर्देश पर याचिका दाखिल की जा रही है। 
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समीक्षा संबंधी अपील दाखिल करने का कोई आधार नहीं

अदालत में अपील का आधार नहीं बनता - फोटो : डेमो पिक
सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार को स्टैंडिंग काउंसिल की ओर से बार-बार बताया जा रहा था कि इसकी समीक्षा संबंधी अपील दाखिल करने का कोई आधार नहीं बनता है। संविधान के दायरे में रहते हुए ही समीक्षा की अपील दाखिल की जा सकती है। यह भी बताया गया कि इस फैसले से राज्य के अनुच्छेद 370 को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है। इन सबके बाद भी लगातार दबाव बनाया जाता रहा। 

सूत्रों ने बताया कि जुलाई 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर कहा था कि ट्रांसफर आफ प्रापर्टी एक्ट के तहत नान स्टेट सब्जेक्ट को यहां की संपत्ति हस्तांतरित नहीं हो सकती है। इस आधार पर राज्य को छूट दी गई थी।

बाद में लोन डिफाल्टरों ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में सरफेसी एक्ट को चुनौती दी। इस पर कोर्ट ने 2015 में इस एक्ट को राज्य में लागू होने से खारिज कर दिया। 16 दिसंबर के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। 
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सरकार की ओर से बनाया जा रहा था दबाव

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : FILE PHOTO
सूत्रों का कहना है कि कश्मीर में इस फैसले को लेकर हो रहे विरोध को देखते हुए ही सरकार की ओर से दबाव बनाया जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि यहां की संपत्ति दूसरे राज्य के लोगों को नहीं दी जा सकती है।


ट्रांसफर आफ प्रापर्टी एक्ट के तहत यह अधिकार राज्य को प्राप्त है। इस वजह से जेके बैंक के साथ मिलकर एक कंपनी का गठन किया गया है जो लोन डिफाल्टरों की संपत्तियों की खरीद करेगा और इसे राज्य के लोगों को ही बेचा जा सकता है। 

सोमवार को शाम सवा छह बजे इस्तीफा देने के लिए कहा गया। इसके 15 मिनट बाद शाम साढ़े छह बजे इस्तीफा दे दिया। इसके पीछे के कारणाें के बारे में किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं कर सकता। - एडवोकेट सुनील फर्नांडीस, सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल
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