नई प्रशासनिक इकाइयों का गठन हुए एक वर्ष बीत चुका है। लेकिन आज भी इनके ज्यादातर कार्यालय किराये के मकानों में ही चल रहे हैं। इससे प्रति माह तीस से पैंतीस हजार रुपये किराये में जा रहे हैं। खंड विकास कार्यालय आदर्श गांव अला के सामुदायिक भवन में है, नहीं तो किराये का आंकड़ा पच्चीस हजार को पार करता।
किराये की इमारतों पर गौर करें, तो सन 1982 में दो जुलाई को शिक्षा जोन कार्यालय(जेडईओ) का उद्घाटन हुआ था, जो अभी तक किराये की इमारत में ही चल रहा है। वहीं करीब सत्ताईस वर्ष पहले कृषि विभाग के कार्यालय का उद्घाटन हुआ था। वह भी तीन दुकानें किराये पर लेकर चलाया जा रहा है। पशु चिकित्सा केंद्र भी किराये की दो दुकानों में चला रहा है।
तहसील कार्यालय को दो मंजिला मकान को किराये पर लेकर चलाया जा रहा है। खाद्य आपूर्ति विभाग का कार्यालय भी किराये के मकान में ही है। गनीमत है आदर्श गांव अला में सामुदायिक भवन बन चुका था, अन्यथा खंड विकास कार्यालय भी किराये पर होता। कसबे में नगरपालिका के अधीन 32 कनाल भूमि उपलब्ध है।
सरकारी भूमि भी काफी है, जिसे हासिल कर सरकारी कार्यालय बनाने में स्थानीय नगर पालिका असमर्थ दिख रही है। वहीं स्थानीय राजस्व विभाग भी कोई प्रयास करता नहीं दिखाई देता। नगर पालिका के ईओ कैलाश चौधरी का कहना है नगर पालिका के अधीन 32 कनाल भूमि में से करीब चौदह कनाल में पार्क बना है।
अभी कुल आठ कनाल जमीन ही है, जिस पर सड़क विस्तारीकरण कार्य के चलते नपा कार्यालय पीछे हटकर बनाना पड़ेगा। अन्य दस कनाल भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ केस चल रहा है। बताते चलें कि बीडीओ कार्यालय छोड़कर बाकी सभी कार्यालय कसबे में ही चल रहे हैं, जिसमें नियाबत को छोड़कर अन्य सभी किराये पर हैं।