राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री व नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला की ओर से राजभवन को लिखे पत्र का जवाब देते हुए राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि पीआरसी में बदलाव पर सरकार कोई विचार नहीं कर रही है।
यह जम्मू कश्मीर के कानूनी संरचना का हिस्सा है। इस कानून से छेड़छाड़ का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। उमर को भेजे पत्र में राज्यपाल ने कहा है कि पीआरसी बनाने की प्रक्रिया में सभी हितधारकों से व्यापक विचार विमर्श किए बगैर किसी प्रकार का बदलाव किए जाने की कोई संभावना नहीं है।
राय मशविरा जरूरी है ताकि किसी के दिमाग में कोई अनावश्यक बात न रहे। जहां तक मेरी जानकारी है इस समय न तो इस प्रकार का कोई प्रयास किया गया है और न ही कोई फैसला। उन्होंने आश्वस्त किया कि पीआरसी जारी करने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि पीआरसी वास्तविक स्टेट सब्जेटधारकों को आवेदन करने के 30 दिन के भीतर प्राप्त हो जाना चाहिए। यह देखा गया है कि इस समय सीमा में पीआरसी हासिल करने में आवेदकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।