फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीर: सत्ता संग्राम के बीच पीडीपी, कांग्रेस, एनसी को बड़ा झटका, राज्यपाल ने भंग की विधानसभा

Wed, 21 Nov 2018 09:17 PM IST
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
विधानसभा भंग करने का पत्र - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

जम्मू कश्मीर में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच गवर्नर सत्यपाल मलिक ने आनन फानन में विधानसभा भंग कर दी है। इस आदेश के बाद नई सरकार के गठन की अटकलों और प्रयासों पर विराम लग गया है। 19 दिसम्बर को राज्यपाल शासन समाप्त हो रहा है। उसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू होना लगभग तय है।

विज्ञापन


समझा जाता है कि लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू कश्मीर विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं। इससे पहले महागठबंधन और सज्जाद लोन के नेतृत्व में भाजपा द्वारा सरकार बनाने की कोशिशें तेज हुईं थीं। अब इन सारी कोशिशों पर विराम लग गया है।

दिनभर सियासी सरगर्मी तेज रही। शाम को पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। इस दावे के तुरंत बाद बाद पीडीपी में बगावत हुई और इमरान अंसारी के नेतृत्व में बागी गुट ने 18 विधायक साथ होने का दावा किया। उधर पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी राजभवन को पत्र देकर सरकार बनाने का का दावा किया।
विज्ञापन


लोन ने दावा है किया कि उन्हें बहुमत हासिल है। इन दावों से रियासत में गहमागहमी बढ़ गई। इन दावों के पहले ही गवर्नर बुधवार को अचानक दिल्ली रवाना हो गए थे। पीडीपी नेता महबूबा का वीरवार को दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलने का कार्यक्रम तय था। 

राज्यपाल सत्यपाल मलिक को भेजे पत्र में महबूबा ने कहा कि उनका दल 29 विधायकों के साथ सबसे बड़ा दल है और कांग्रेस को 12 व नेकां के 15 विधायकों का भी समर्थन उनकी पार्टी को मिल गया है। इस तरह उन्हें 58 विधायकों का समर्थन हासिल है।

महबूबा ने यह पत्र मेल से भी गवर्नर को भेजा। ट्वीट कर कहा कि उन्होंने  फैक्स से पत्र राजभवन भेजने को कोशिश की लेकिन यह रिसीव नहीं हुआ और गवर्नर से फोन पर भी बात नहीं हो सकी। 

उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि पांच माह से विधानसभा भंग करने की मांग कर रहे थे। लेकिन यह इत्फियाक है कि महबूबा मुफ्ती के सरकार बनाने के दावे के एक पत्र ने विधानसभा को भंग करवा दिया। 

सज्जाद लोन ने भी चिट्ठी की थी व्हाट्सएप 
जहां एक तरफ महबूबा मुफ्ती ने सरकार बनाने का दवा किया वहीं पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी अपना दवा पेश कर दिया। लोन ने भी गवर्नर को पत्र लिखा और दावा किया कि राज्य में सरकार बनाने के लिए उनके पास पर्याप्त विधायक हैं। उन्होंने गवर्नर के पीए के पास वॉट्सऐप पर लेटर भेजा था, जिसे उन्होंने ट्वीट भी किया। 

ट्वीट वार

गुलाम नबी आजाद 
मैने दोपहर में भी कहा था कि यह एक सुझाव (पीडीपी-नेकां-कांग्रेस गठबंधन) है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। भाजपा ने केवल एक प्रस्ताव बनने के बाद ही विधानसभा भंग कर दी। 
प्रो. सैफुद्दीन सोज (कांग्रेस )
महबूबा को अदालत में चला जाना चाहिए। क्योंकि जो भी केंद्र के निर्देशों पर राज्यपाल ने किया है वह अलोेकतांत्रिक और अंसवैधानिक है। महबूबा मुफ्ती ने कांग्रेस और नेकां के पीडीपी को समर्थन के बाद ही राज्यपाल को लिखा था। राज्यपाल को उन्हें एक मौका देना चाहिए था। 
रवींद्र रैना, भाजपा 
भाजपा राज्यपाल के फैसले का स्वागत करती है। एक बार फिर नेकां, कांग्रेस और पीडीपी की साजिश नाकाम हुई है। जिससे जम्मू और लद्दाख के साथ अन्याय होता। क्या वह चुनाव से पहले गठबंधन बनाएंगे। 
इमरान अंसारी, पीडीपी 
अगर राज्यपाल हमें फ्लोर टेस्ट के लिए बुलाते तो हम अपने सदस्य दिखाते। अब स्थिति अलग है। चुनाव ही अकेला विकल्प है। अगर महबूबा को लगता है कि यह अलोेकतांत्रिक है तो उनके पास भी इस जनतांत्रिक देश में कई विकल्प हैं। 
विज्ञापन

दिन भर बदलते रहे समीकरण

वीरवार को दिनभर सियासी समीकरण बदलते रहे। पीडीपी नेता अल्ताफ बुखारी ने पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां नेता उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर कहा कि नेकां, पीडीपी और कांग्रेस मिलकर सरकार बनाने पर सहमत हैं। जल्द अच्छी खबर मिलेगी। तब चर्चा थी कि नई पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में नहीं बनेगी। नए नेता के रूप में पीडीपी के अल्ताफ बुखारी का नाम उभर कर सामने आया। नई सरकार बनाने के लिए पीडीपी, कांग्रेस और नेकां के बीच बुधवार को दिनभर बैठकों का दौर चलता रहा। सीपीएम के नेता एम वाई तारिगामी ने नेशनल कांफ्रेंस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। इस बैठक में पीडीपी को समर्थन देकर सरकार बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। 

नए मुख्यमंत्री केरूप में अल्ताफ की थी चर्चा
नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस पीडीपी को समर्थन तो देना चाहती थी लेकिन महबूबा मुफ्ती को मुख्यमंत्री बनाने के मुद्दे पर कई आपत्तियां थीं। लिहाजा पीडीपी के अल्ताफ बुखारी के नाम पर सहमति बन रही थी। महबूबा ने बाद में खुद दावा पेश कर चौंकाया। पीडीपी के पास 28, कांग्रेस के पास 12 और नेकां के पास 15 विधायक थे। इन तीनों को मिलाकर आकंड़ा 55 तक पहुंच रहा था जबकि बहुमत के लिए सिर्फ 44 विधायक चाहिए था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें