गुलाम नबी आजाद
मैने दोपहर में भी कहा था कि यह एक सुझाव (पीडीपी-नेकां-कांग्रेस गठबंधन) है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। भाजपा ने केवल एक प्रस्ताव बनने के बाद ही विधानसभा भंग कर दी।
प्रो. सैफुद्दीन सोज (कांग्रेस )
महबूबा को अदालत में चला जाना चाहिए। क्योंकि जो भी केंद्र के निर्देशों पर राज्यपाल ने किया है वह अलोेकतांत्रिक और अंसवैधानिक है। महबूबा मुफ्ती ने कांग्रेस और नेकां के पीडीपी को समर्थन के बाद ही राज्यपाल को लिखा था। राज्यपाल को उन्हें एक मौका देना चाहिए था।
रवींद्र रैना, भाजपा
भाजपा राज्यपाल के फैसले का स्वागत करती है। एक बार फिर नेकां, कांग्रेस और पीडीपी की साजिश नाकाम हुई है। जिससे जम्मू और लद्दाख के साथ अन्याय होता। क्या वह चुनाव से पहले गठबंधन बनाएंगे।
इमरान अंसारी, पीडीपी
अगर राज्यपाल हमें फ्लोर टेस्ट के लिए बुलाते तो हम अपने सदस्य दिखाते। अब स्थिति अलग है। चुनाव ही अकेला विकल्प है। अगर महबूबा को लगता है कि यह अलोेकतांत्रिक है तो उनके पास भी इस जनतांत्रिक देश में कई विकल्प हैं।
वीरवार को दिनभर सियासी समीकरण बदलते रहे। पीडीपी नेता अल्ताफ बुखारी ने पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां नेता उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर कहा कि नेकां, पीडीपी और कांग्रेस मिलकर सरकार बनाने पर सहमत हैं। जल्द अच्छी खबर मिलेगी। तब चर्चा थी कि नई पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में नहीं बनेगी। नए नेता के रूप में पीडीपी के अल्ताफ बुखारी का नाम उभर कर सामने आया। नई सरकार बनाने के लिए पीडीपी, कांग्रेस और नेकां के बीच बुधवार को दिनभर बैठकों का दौर चलता रहा। सीपीएम के नेता एम वाई तारिगामी ने नेशनल कांफ्रेंस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। इस बैठक में पीडीपी को समर्थन देकर सरकार बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
नए मुख्यमंत्री केरूप में अल्ताफ की थी चर्चा
नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस पीडीपी को समर्थन तो देना चाहती थी लेकिन महबूबा मुफ्ती को मुख्यमंत्री बनाने के मुद्दे पर कई आपत्तियां थीं। लिहाजा पीडीपी के अल्ताफ बुखारी के नाम पर सहमति बन रही थी। महबूबा ने बाद में खुद दावा पेश कर चौंकाया। पीडीपी के पास 28, कांग्रेस के पास 12 और नेकां के पास 15 विधायक थे। इन तीनों को मिलाकर आकंड़ा 55 तक पहुंच रहा था जबकि बहुमत के लिए सिर्फ 44 विधायक चाहिए था।