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EXCLUSIVE: कश्मीर पर स्पष्ट नीति, सुरक्षा के मामले पर महबूबा के भी दबाव में नहीं आएगी सरकार

Thu, 03 Aug 2017 09:25 PM IST
श्रेयांश त्रिपाठी,अमर उजाला/जम्मू
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पीएम मोदी और महबूबा मुफ्ती - फोटो : फाइल फोटो
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गृह मंत्रालय के जम्मू-कश्मीर मामलों से जुड़े विभागों में हर रोज कुछ नए कदमों पर चर्चा हो रही है। एजेंसियों के अधिकारी कश्मीर के मामले पर लगातार स्पष्ट तरीके से एक नियत दिशा की नीति निर्माण में जुटे हैं।
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बड़ी बात ये है कि इस बार कश्मीर के हालातों पर सरकार की सभी एजेंसियां एक मत तरीके से इसके स्थायी समाधानों की राह प्रशस्त करना चाहती हैं। दरअसल 2014 में केंद्र में पीएम मोदी की सरकार बनने के बाद से कश्मीर के लिए एक स्थायी रोडमैप तैयार करने की दिशा में प्रयास शुरू हुए हैं। 

इन प्रयासों में न सिर्फ जम्मू-कश्मीर की समस्या का समाधान शामिल है बल्कि इसके मुख्यधारा से समन्वय और संपूर्ण विकास के भविष्य को प्रशस्त करने की योजना भी निहित है। इन प्रयासों पर पूरा अमल हो इसके लिए खुद पीएम और केंद्र के शीर्ष अधिकारी कश्मीर के हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। 
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GST काउंसिल से लेकर तमाम कोशिशों के जरिए मुख्यधारा से जुड़ रहा कश्मीर

पीएम नरेंद्र मोदी - फोटो : फाइल फोटो
कश्मीर में सेना और सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी गई है। इसमें आवाम के साथ कश्मीर में विश्वास बहाली की तमाम कोशिशों के पर्याय दिख रहे हैं तो वहीं आतंक के अंत के लिए सेना के ताबड़तोड़ ऑपरेशन भी लेकिन इन सब में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं। 

सरकार की दिशा स्पष्ट है कि कश्मीर में आम आवाम को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास हों। इसके लिए कश्मीर में रास्तों के निर्माण, रेल के विकास से लेकर आम बच्चों में प्रतिभा के विकास तक के लिए एक विशेष रूप के कार्यक्रम चलाए गए हैं। सेना का सद्भावना मिशन भी इसी का हिस्सा है। 

इन सब के साथ कश्मीर में सकारात्मक माहौल भी बनाने की कोशिश है। जीएसटी काउंसिल की बैठक से लेकर खुद पीएम का सियाचिन तक जाना साबित कर सकता है कि कश्मीर को सरकार महत्वपूर्ण फैसलों की एक धरा बनाकर देश की मुख्य धारा की राजनीति में शामिल करना चाहती है। 

महबूबा मुफ्ती के जनाधार वाले इलाकों में भी राजनीतिक दबाव में नहीं है सेना

सीएम महबूबा मुफ्ती - फोटो : File Photo
इन सब के बीच कश्मीर में एलओसी से लेकर शहरी इलाकों तक सुरक्षा के मामले में सरकार किसी भी तरह के दबाव में आने की स्थिति में नहीं दिख रही है। वहीं सेना को भी कश्मीर में उसके ऑपरेशनों और आतंक के अंत के लिए किसी भी तरह के ऑपरेशन की छूट दी गई है। 

बड़ी बात ये कि पीडीपी जैसी सहयोगी पार्टी जिसका अधिकतर जनाधार दक्षिण कश्मीर में हैं के साथ सरकार चलाने वाली भाजपा की केंद्र में रहते इन इलाकों में किसी भी सैन्य कार्रवाई के समय महबूबा मुफ्ती के दबाव में नहीं आ रही है। 

तारीख में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सेना के जवानों द्वारा दक्षिण कश्मीर में तमाम आतंक निरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं। अनंतनाग जो कि महबूबा मुफ्ती का गृह जनपद है भी इसी इलाके का हिस्सा है लेकिन इन सब के बाद भी सेना के ऊपर प्रदेश से लेकर केंद्र तक से इस इलाके में आतंक के खिलाफ ऑपरेशनों को लेकर किसी भी तरह का दबाव बनाने की कोशिश नहीं हो पा रही है। 
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सुरक्षा पर कभी कोई समझौता नहीं करेगी सरकार

नरेंद्र मोदी - फोटो : File Photo
कश्मीर के मामले का पूरा कंट्रोल पीएम मोदी के पास है। गृह मंत्रालय और सरकार की तमाम एजेंसियां यहां के हालातों के बारे में राज्य सरकार से प्रभावी समन्वयन भी कर रहे हैं। इन सब के बीच स्थितियां स्पष्ट हैं कि रियासत में आंतरिक और सीमा सुरक्षा के विषय पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने वाला है।

वहीं सरकार की राह इस दिशा में भी साफ है कि कश्मीर के लोगों को देश के अपने लोगों की भावना का एहसास कराया जाए। सरकार इस दिशा में कश्मीरियों के साथ खड़ी दिख भी रही है और सबसे बड़ी बात ये कि आवाम में भी अलगाववादियों का भरा जहर अब असर छोड़ने लगा है, हो सकता है ये कश्मीर की एक नई सुबह का साक्षी बने।  
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