किसानों ने धान की कटाई शुरू कर दी है, लेकिन अब तक बासमती धान का भाव तय नहीं किया गया है। इससे किसान असमंजस में हैं कि उन्हें उचित भाव मिल भी सकेगा या नहीं। पहले से ही धान को बड़े स्तर पर नुकसान हो चुका है। पिछले साल शुद्ध बासमती का भाव छह हजार रुपये प्रति क्विंटल रहा था।
इससे किसानों को काफी लाभ हुआ था। बाद में भाव जरूर कम हो गया था, लेकिन अब भी बासमती चावल 130 रुपये किलो बिक रहा है। बासमती, शरबती बासमती, रतना सहित दूसरे चावलों के भाव अधिक हैं। इस समय व्यापारी शुद्ध बासमती तीन हजार, शरबती बासमती 1800 और रतना आदि का भाव 1500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों से खरीद रहे हैं।
किसान मदन लाल, बंसी लाल, रूपलाल, गुरचरण सिंह, अजीत सिंह का कहना है कि किसानों को इस बार धान की फसल तैयार करने में तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा। धान की रोपाई के समय पाकिस्तानी गोलाबारी का सामना करना पड़ा जो अब तक जारी है। बाढ़ और मूसलाधार बारिश से भी फसल को नुकसान हुआ।
सरकार ने अब तक मुआवजा देकर राहत नहीं दी है। इसके बावजूद वर्तमान में बढि़या धान का तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। इसी प्रकार अन्य प्रजातियों के धान की भी कीमत मिल रही है।
इन किसानों का कहना है कि सरकार की लचर नीतियों के चलते व्यापारी वर्ग लाभ उठा रहा है। धान की पैदावार करने वाले किसानों को वाजिब कीमत नहीं मिल रही है।
किसानों ने मांग की है कि राज्य सरकार बासमती सहित धान की अन्य किस्मों के भाव तय किए जाएं। उनका कहना है कि अगर धान की कीमत सही नहीं मिली तो वह इसका घरों में भंडारण करने को मजबूर हो जाएंगे।