संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जीएमसी की एक्सचेंज जवाब दे गई है। एक्सचेंज के बैठ जाने से अस्पताल के भीतर करीब 250 फोन कनेक्शन ठप हो गए हैं। बाहर से जरूरी मैसेज रिसीव करने के लिए अस्थायी तौर पर एकमात्र टेलीफोन चल रहा है।
चिकित्सा संबंधी जानकारियों का आदानप्रदान करने के लिए मोबाइल का ही सहारा बचा है। ऐसे में अगर कोई आपात स्थिति बनती है तो व्यवस्थाओं को सुचारू बनाना मुश्किल होगा। जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता के अनुसार एक्सचेंज में आई तकनीकी समस्या का समाधान किया जा रहा है।
शुक्रवार की रात आठ बजे जीएमसी की एक्सचेंज अचानक बैठ गई। एक्सचेंज के लाइन कार्ड और मैन कार्ड के जल जाने से यह समस्या आई। एक्सचेंज में वोल्ट मीटर के साथ अर्थिंग प्वाइंट में भी खराबी बनी हुई है।
बड़ी बात यह है कि डेढ़ साल से इसकी बैटरी रामभरोसे चल रही हैं। एक्सचेंज में दस लाइन जंक्शन की क्षमता है, लेकिन मौजूदा समय में छह ही चलाए जा रहे थे। तकनीकी विशेषज्ञों की जांच में 13 लाइन कार्ड जले पाए गए हैं।
एक्सचेंज की मरम्मत के लिए एक लाख 80 हजार रुपये का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन इसमें भी एक माह का समय लगेगा, जिसने अस्पताल प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
अस्पताल प्रशासन ने सोमवार को एक्सचेंज मुद्दे पर अधिकारियों की बैठक बुलाई है। एक्सचेंज का काम बाहर और भीतर की काल को रिसीव करके संबंधित स्थान तक जानकारी पहुंचाना होता है। अब सभी कनेक्शन के बंद हो जाने से सिर्फ मोबाइल से ही काम किया जा रहा है।
अस्पताल के भीतर इमरजेंसी, आईसीयू, सीसीयू, आपरेशन थियेटर सहित अन्य महत्वपूर्ण यूनिट और वार्ड एक्सचेंज के माध्यम से आपस में संचार संपर्क से जुड़े रहते हैं। इस सुविधा का मरीजों को भी लाभ मिलता है, लेकिन सभी कनेक्शन बैठ जाने से स्टाफ के साथ मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उल्लेखनीय है कि जीएमसी की एक्सचेंज पहले भी कई बार जवाब दे चुकी है।