कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के कई मुद्दों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं। यहां आतंकवाद के साथ चीन और पाकिस्तान चुनौती हैं। हमारी सरहदों पर दुश्मन अधिक सक्रिय है, लिहाजा हमारी जिम्मेदारी है कि हम एकजुट होकर इन समस्याओं का सामना करें। वर्ष 1947 से लेकर आज तक सीमा पर पाकिस्तान और चीन के साथ तनाव जारी है। आजाद शनिवार को सैनिक कॉलोनी में गांधी ग्लोबल फैमिली के शांति सम्मेलन में बोल रहे थे। वह इस फैमिली के अध्यक्ष भी हैं।
आजाद ने कहा कि वह 1969 में कश्मीर में एसपी कॉलेज में पढ़ते हुए महात्मा गांधी की विचारधारा से जुड़े। उनकी सच और अहिंसा की विचारधारा पर हमेशा कायम रहा। फिर युवा कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की। लेकिन मैंने कभी धर्म जाति को मायने नहीं दिया। वर्ष 2005-06 में मुख्यमंत्री रहते हुए सोपोर में पहली तकरीर में मैंने कहा था कि मेरी हुकूमत में कोई भी अधिकारी धर्म जाति की बुनियाद पर इंसाफ नहीं बांटेगा। सभी धर्मों का सम्मान करना हमारा फर्ज है। कांग्रेस में वर्षों काम करने का मौका मिला और सभी ने प्यार दिया।
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गुलाम नबी आजाद ने भाजपा सरकार की नीतियों पर कहा कि आज हम जम्मू-कश्मीर में बंटे हुए हैं। बेरोजगारी चरम पर है। हमारी पहचान खत्म हुई है। राज्य का दर्जा वापस लेने के लिए हमारे विधायक और मुख्यमंत्री होना जरूरी है। लेह केंद्र शासित प्रदेश चाहता था, लेकिन कारगिल नहीं। भाजपा सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से झूठे वादे किए हैं। आज कई विभागों में निकाली जा रही नौकरियों में बाहरी लोगों से आवेदन मांगे जा रहे हैं। सरकार ने टोल के साथ संपत्ति और अन्य टैक्स बढ़ाकर आम आदमी को परेशान किया है अब उनके कपड़े ही बचे हुए हैं।
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जम्मू-कश्मीर में विकास पर कुछ नहीं दिखा है। कौन सा नया कर लगाना है इस पर रणनीति बनाई जाती है। जम्मू-कश्मीर और देश को मजबूत बनाने के लिए कांग्रेस ही एक रास्ता है। इस दौरान गांधी ग्लोबल फैमिली के उपाध्यक्ष एसपी वर्मा ने ग्लोबल फैमिली की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। डॉ. तरण सिंह, अशोक कपूर, बशीर अहमद शेख, यूनुस मट्टू, मनीष जोशी, विजय शर्मा मौजूद रहे।
कड़े सुरक्षा घेरे में रहे वीआईपी
सैनिक कॉलोनी के एक फार्म में हुए शांति सम्मेलन में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद सहित लोकसभा और राज्यसभा के मौजूदा व पूर्व सदस्यों के पहुंचने से सुरक्षा घेरा बढ़ाया गया था। स्टेज के आगे कंटीले तार बिछाए गए थे, जिसमें स्टेज के आसपास पूर्व मंत्रियों, विधायकों, एमएलसी, डीडीसी सदस्य सहित अन्य प्रमुख लोगों को ही बिठाया गया। सम्मेलन के लिए बड़ी संख्या में पार्टी समर्थक ढोल के साथ पहुंचे हुए थे।