इसके बाद आजाद ने कहा कि मैं दोस्ती के नाते उनसे मिलने के लिए यहां आया हूं। मैं यहां उन सभी सांसदों की तरफ से आया हूं, जिन्होंने फारूक साहब की रिहाई के बारे में बात की थी। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अगर हमें कश्मीर को खुश रखने की जरूरत है तो सभी नेताओं को रिहा करने की जरूरत है और सभी राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत है।
इसके बाद उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसी भी विकास परियोजना पर कोई काम नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं पर्यटन चला गया, हस्तकला समाप्त हो गई। यहां तक कि जम्मू की हालत भी खराब हो गई है। इसका एक ही उपाय है कि सभी राजनीतिक नेताओं को रिहा किया जाए।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य को केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने का निर्णय जम्मू-कश्मीर के लोगों का अपमान है। इसे निरस्त करना होगा। जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य घोषित किया जाना चाहिए।