प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने एमबीबीएस और इंजीनियरिंग सीटें मुफ्त उपलब्ध कराकर सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए आतंकियों के परिवार को मुआवजा देकर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम शुरू किया था।
अल्ताफ व मंजूर की तलाश
मामले के संबंध में भट के भाई अल्ताफ अहमद भट और शाह के भाई मंजूर अहमद शाह और अन्य की भी तलाश जारी है। दोनों नामजद आरोपी 1990 के दशक की शुरुआत में अवैध हथियारों और गोला-बारूद के प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान चले गए थे। इन्होंने भारत में हुर्रियत से जुड़े लोगों के लिए इस श्रेणी के तहत प्रवेश से संबंधित मामलों को सुगम बनाने में आईएसआई की ओर से अहम भूमिका निभाई, जोकि आतंकवाद संबंधित गतिविधियों में पैसा उपलब्ध कराने का एक नापाक जरिया था।
जांच के अनुसार, औसतन एक सीट की कीमत 10 से 12 लाख रुपये के बीच थी, लेकिन कुछ मामलों में हुर्रियत नेताओं के हस्तक्षेप पर कीमत कम कर दी गई थी। दूसरे शब्दों में, हस्तक्षेप करने वाले एक हुर्रियत नेता के सियासी कद के आधार पर इच्छुक छात्र और उसके परिवार को रियायतें दी गईं।
अलगाववादी नेताओं को प्रतिवर्ष 40 सीटें आवंटित
पाकिस्तान में एमबीबीएस व अन्य व्यावसायिक कार्यक्रमों की चालीस सीटें अलग-अलग हुर्रियत नेताओं के लिए आवंटित थीं। एक अनुमान के मुताबिक सीटें बेचकर लगभग 4 करोड़ रुपये प्रति वर्ष जुटाए गए।