- वर्ष 2022 में एनएचएआई ने केंद्र को भेजी थी डीपीआर
- राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा न होने से अटकी परियोजना
- 4,500 करोड़ रुपये से प्रस्तावित था प्रोजेक्ट
विशाल जसरोटिया
सांबा। सांबा-मानसर-उधमपुर फोरलेन परियोजना फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने वर्ष 2022 में इस पहाड़ी मार्ग को फोरलेन बनाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र सरकार को भेजी थी। चार साल बीत जाने के बाद भी डीपीआर को मंजूरी नहीं मिल पाई है।
करीब 61 किलोमीटर लंबे सांबा-मानसर-उधमपुर पहाड़ी मार्ग के विस्तार के लिए 4,500 करोड़ रुपये से परियोजना प्रस्तावित की गई थी। इसमें 8.5 किलोमीटर लंबी सुरंगों का निर्माण, पांच बड़े और 15 छोटे पुल बनाने का प्रस्ताव भी शामिल था ताकि पहाड़ी क्षेत्र के तीखे मोड़ सुरक्षित बनाए जा सकें।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार परियोजना आगे न बढ़ पाने की बड़ी वजह सांबा-मानसर-उधमपुर मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित नहीं है। इसी कारण इसके फोरलेन विस्तार को मंजूरी मिलने में अड़चन आ रही है। परियोजना अभी तक प्रारंभिक स्तर से आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे क्षेत्र के विकास और पर्यटन को रफ्तार मिलने की उम्मीद थी लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी लोगों में निराशा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन बनने से सांबा, मानसर और उधमपुर के बीच आवागमन आसान होगा। मानसर झील जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होगी। श्रीनगर जाने के लिए मालवाहक वाहनों और पर्यटकों को लाभ मिलेगा लेकिन उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है।
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दावों और हकीकत में फर्क
अगस्त 2025 में कुछ भाजपा नेताओं ने इस परियोजना को मंजूरी मिलने की बात कही थी। उस समय क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी थी कि जल्द ही सड़क के विस्तार का काम शुरू होगा लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई आधिकारिक मंजूरी सामने नहीं आई है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार अब इस मार्ग से जुड़ी किसी भी बड़ी योजना पर भारतमाला परियोजना–2047 के तहत ही विचार किया जा सकता है। ऐसे में फिलहाल इस परियोजना के जल्द शुरू होने की संभावना कम नजर आ रही है।
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हर दिन जोखिम भरा सफर
सांबा से मानसर और आगे उधमपुर जाने वाले इस मार्ग पर कई जगह सड़क बेहद संकरी है। तीखे मोड़ हैं। भारी वाहनों के गुजरने के दौरान हादसे का खतरा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ी होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
स्थानीय निवासी गगन कुमार (टैक्सी चालक) का कहना है कि मानसर रोड पर कई जगह तीखे मोड़ हैं जहां दो बड़े वाहन मुश्किल से पास होते हैं। सड़क चौड़ी हो जाए तो सफर सुरक्षित और आसान हो जाएगा।
पर्यटन विस्तार, व्यापार
की उम्मीदें भी अधूरी
मानसर झील क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि सड़क की स्थिति का असर पर्यटन पर भी पड़ रहा है। मानसर क्षेत्र के दुकानदार मोहिंदर कुमार का कहना है कि झील घूमने आने वाले पर्यटकों की संख्या पहले ही कम है। सड़क खस्ताहाल होने से पर्यटक क्षेत्र से मुंह फेर लेते हैं।
उम्मीदें अब भी कायम
स्थानीय निवासी संदीप शर्मा का कहना है कि यह सड़क सांबा और उधमपुर के बीच सबसे सीधा मार्ग है। अगर यह फोरलेन विस्तार हो जाए तो यात्रा का समय कम होगा और क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी। चार साल बीत जाने के बाद भी डीपीआर को अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है। ऐसे में सांबा, मानसर और उधमपुर के लोगों को फिलहाल इस सड़क के विस्तार से कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है
सांबा-मानसर-उधमपुर मार्ग को लेकर अभी मामला केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के पास विचाराधीन है। परियोजना को लेकर कोई भी फैसला अभी नहीं आया है।
- राजीव कुमार, प्रोजेक्ट डायरेक्टर (क्षेत्रीय), एनएचएआई