राजोरी के नाबन मोहल्ले में रहने वाले हाजी गुलाम हुसैन ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनका परिवार जिस जनाजे में शामिल होने के लिए जा रहा है, खुद उन्हें इसी तरह उसके जनाजे में शामिल होना पड़ेगा।
पौनी में हुए सड़क हादसे में मारे गए चारों लोग पौनी के बराक गांव में अपने किसी रिश्तेदार के जनाजे में शामिल होने के लिए गए थे, लेकिन वह तो जनाजे में शामिल नहीं हुए, खुद मौत उन्हें अपने साथ ले गई। जैसे ही चारों के शव राजोरी में पहुंचे तो हर तरफ चीख पुकार और लोगों की आंखें नम थी।
जानकारी के अनुसार, गुलाम हुसैन की पत्नी रजिया बेगम अपने बेटे मोहम्मद जुबीर, बहू परवेज अख्तर और जमाई मोहम्मद रशीद के साथ पौनी के बराक गांव में शुक्रवार सुबह करीब 5.30 बजे राजोरी से निकले थे।
रास्ता भटकने से हुआ हादसा
यहां उन्हें एक जनाजे में शरीक होना था। इनके साथ राजोरी का ही एक अन्य परिवार भी निकला। दोनों राजोरी से साथ-साथ ही निकले। लेकिन पौनी पहुंचने पर गुलाम हुसैन का परिवार दूसरे परिवार से पीछे रह गया।
यहां उन्होंने फोन पर दूसरे परिवार से संपर्क किया कि वह रास्ता भूल गए हैं और पौनी पहुंच गए हैं। यहां उन्हें दूसरे परिवार के लोगों ने कहा कि वह वापस लौट कर आएं। अभी वह लोग पौनी से निकले ही थे कि आगे एक तीखे मोड़ पर गाड़ी चकमा खा गई और दरिया में गिर गई।
हादसे में चारों लोगों की मौत हो गई। अपनों को खाने के दर्द से बेजार गुलाम हुसैन रोते रोते कहते हैं, काश वह लोग उनके साथ साथ रहे होते तो यह हादसा नहीं होता। बार बार यही बात उनकी जुबान पर आती रही।
गमगीन माहौल में हुए सुपुर्दे-खाक
वहीं शुक्रवार शाम को रजिया बेगम, परवेज अख्तर और मोहम्मद जुबीर को सुपुर्दे खाक कर दिया गया। जबकि मोहम्मद रशीद के शव को उसके पैतृक गांव बेहरामगला भेज दिया।
ईद मनाने से पहले ही आ गई मौत
मोहम्मद शरीफ गुलाम नबी अजाद के भाई मुस्तफा आजाद के पीएसओ हैं। वह पिछले कुछ दिनों से छुट्टी पर थे। ईद मनाने के लिए वह अपने घर आए हुए थे।
लेकिन उनके परिजनों को नहीं पता था कि ईद मनाने की खुशियां मातम में बदल जाएंगी। घर के लोग ईद की तैयारियां कर रहे थे, लेकिन पलभर में ही सारी दुनिया उजड़ती चली गई।