दोमाना और मढ़ विधानसभा क्षेत्रों में आसमान से आई आफत की चपेट में आकर पटरी से उतरा जनजीवन 48 घंटे बाद भी सामान्य नहीं हो सका है।
आला अफसर वीरवार को कुछ स्थानों पर गए तो जरूर, लेकिन प्रशासन की ओर से पीड़ितों को कोई मदद अभी तक हासिल नहीं हुई है।
बेघर और तबाह होकर खुले आसमान के नीचे वक्त गुजारने को मजबूर लोग अब बारिश के नाम से ही सिहर उठते हैं।
मौसम विभाग ने दी भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने शनिवार 26 जुलाई को जोरदार बारिश के आसार बताए हैं। ऐसा हुआ तो इससे निपटने के लिए कोई एहतियाती उपाय नहीं किए गए हैं।
हालिया नुकसान का आकलन तक नहीं हुआ है और नयी मुसीबत की आशंका ने सिर उठा लिया है। प्रशासन के पास ऐसे कोई आंकड़े नहीं हैं जिनसे तबाही का आकलन किया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है सवा सौ से अधिक पशुओं के बहने, दर्जनों कुल्ले बहने, सौ से ज्यादा मकानों को नुकसान पहुंचने, सड़कें और पुल टूटने के जो आंकड़े सामने हैं उनके आधार पर नुकसान का कुल आंकड़ा करोड़ों में होना तय है।
तीस जुलाई तक सक्रिय रहेगा मानसून
इनके अलावा हिमालयन पट्टी की शिवालिक पर्वत शृंखलाओं में भी कई इलाके ऐसे हैं जहां बारिश के बाद जमीन का कुछ हिस्सा दलदल में तब्दील हो जाता है।
रामबन, चुबूनाला (पंचेरी) और किशनपुर (मनवाल) में जमीन धंसने के बड़े वाकये हो चुके हैं। शुक्रवार को जम्मू में दिन भर बादल छाए रहे, पर जमकर बरसे नहीं।
तीस जुलाई तक मानसून सक्रिय रहने का अनुमान है। जम्मू जिले में शुक्रवार को सामान्य से 86 प्रतिशत कम 2.1 मिमी बारिश हुई।