राज्य सतर्कता आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री अब्दुल माजिद वानी की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अतर और जस्टिस ताशी राबस्तन की खंडपीठ ने आयोग को निर्देश दिए कि जेएंडके जिम्मेदारी आयोग अधिनियम 2002 के सेक्शन 11(3) और 12 का पालन करें।
याचिका को खारिज करते हुए खंडपीठ ने कहा कि इस अदालत ने एक फरवरी 2016 को एलपीए के बंडल पर सार्वजनिक अदारों के अधिकारों की रक्षा की महत्ता समझाई थी।
जिम्मेदारी आयोग अधिनियम 2002 की धारा 11 और 12 के प्रावधानों के आधार पर दिए गए पूर्व कथित फैसले में महसूस किया गया कि सेक्शन 12 में जिम्मेदारी आयोग किसी भी शिकायत की प्रारंभिक जांच सुनिश्चित करे और फर्जी शिकायतों को बाहर करे।
डोडा के पूर्व विधायक अब्दुल मजीद वानी ने याचिका में आयोग के आदेश पर सवाल खड़ा किया, जिसमें उन्हें एक दिसंबर 2015 को आयोग के समक्ष खुद या अधिकृत व्यक्ति के मार्फत अपना पक्ष रखने को कहा गया था।
याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि प्रारंभिक जांच बैठाए बगैर आयोग ने नोटिस भेजा। आयोग को नोटिस जारी करने के पहले उसका कारण रिकार्ड करना चाहिए था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि याचिका का कोई आधार नहीं है। इसे खारिज किया जाता है।