वन विभाग के कर्मचारी सरकारी राजस्व को चूना लगाने में जुटे हुए हैं। देश के अन्य हिस्सों से पर्यटक घाटी में खूबसूरत स्थल आरू पहलगाम में जब घूमने आते हैं तो उन्हें पच्चीस रूपये की टिकट लेनी पड़ती है।
यदि उनके पास कैमरा होगा तो सौ रुपये अलग से देना पड़ता है। जबकि विदेशों से जो पर्यटक यहां आते हैं,उन्हें पचास रुपये वन विभाग को देने पड़ते हैं। उनके पास कैमरा यदि होगा तो दो सौ रुपये देने पड़ते हैं।
इस सीजन में पहलगाम आरू में भ्रमण करने के लिए देश के करीब एक लाख 21 हजार 456 पर्यटक यहां पहुंचे जबकि यहां पर चार हजार एक सौ विदेशी पर्यटक अबतक यहां पर पहुंचे।
कई सालों से वन विभाग के मुलाजिम वहां पर तैनात हैं। एक तरफ जहां राज्य सरकार बार बार यह कहती आ रही है कि जम्मू कश्मीर को भ्रष्टाचार मुक्त करेंगे वहीं वन विभाग में ऐसे घोटाले सामने आ रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक वन विभाग के मुलाजिमों ने सिर्फ पांच लाख आमदनी दिखाई है जबकि करोड़ों में यह पैसा जमा होना चाहिए। जब यह मामला वन विभाग के मंत्री बाली भगत से उठाया तो उन्होंने यकीन दिलाया कि इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जबकि पहलगाम के लोगों का यह कहना है कि जो भी पर्यटक पहलगाम में आरू घूमने आते हैं, तो उनको पहले टोल टैक्स वनविभाग को देना पड़ता है। यह घोटाला पिछले कई सालों से चल रहा है लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की।