इनके बच्चे भी तमाम सरकारी पदों के लिए पात्र हुए। वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लब्बा राम गांधी व गोरखा समाज की अध्यक्ष करुणा खेत्री का कहना है कि 370 का हटना उनके लिए वरदान रहा और राज्य के पुनर्गठन ने सपने को साकार करने का रास्ता दिया।
देशभर में अनुसूचित जनजाति के लोगों को वन अधिकार हासिल थे लेकिन यहां पहली बार अनुसूचित जनजाति के लोगों व गुज्जर बक्करवालों को यह हक मिला।
एशिया के पहले तैरते ओपन थियेटर के दौरान जगमग डल झील का नजारा
- फोटो : बासित जरगर
दूसरे राज्यों में शादी करने वाली महिलाओं और उनके पति को भी जम्मू-कश्मीर में जमीन व रोजगार का हक देकर सरकार ने भेदभाव को खत्म किया। आतंकवाद के दौर में घाटी में अपनी संपत्तियों को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर कश्मीरी पंडितों को भी उनका हक दिलाने की तीन दशक बाद पहल हुई। इस बारे ऑनलाइन पोर्टल पर अब तक छह हजार शिकायतें मिली हैं। राज्य सरकार ने दो हजार मामलों का निस्तारण कर दिया है। महाजन, खत्री व सिख समुदाय को कृषि भूमि बेचने का अधिकार दिया। लंबे समय से इन समुदाय के लोग इस अधिकार से वंचित थे।
श्रीनगर लाल चौक का घंटाघर
- फोटो : अमर उजाला
भेदभाव समाप्त, बही विकास की बयार
पहली बार त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू होने से विकास में जनभागीदारी बढ़ी है। अब गांव का विकास स्थानीय लोगों की जरूरत के हिसाब से तय हो रहा है। 73 साल के भेदभाव को समाप्त करने में सफलता मिली है। अब कोई भी सेब का उत्पादन कर सकता है। पहले चार कनाल से कम जमीन वालों को बगीचा लगाने या काटने के लिए अनुमति लेनी होती थी। बिजली क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल हुई है। घाटे से उबरकर पहली बार प्रदेश मुनाफे में आया है। पहली बार वाघा की तर्ज पर सुचेतगढ़ बॉर्डर पर रिट्रीट सेरमनी का आयोजन किया गया।
- मनोज सिन्हा, उप राज्यपाल
दो साल में कैसे साफ हो गई डल झील
राज्य के पुनर्गठन के दो साल में सबसे बड़ी कोशिश पारदर्शिता लाने की हुई। पिछले कई सालों में करोड़ों रुपये सफाई पर खर्च हो गए, लेकिन श्रीनगर की डल वैसी की वैसी ही रही। आज डल झील कैसे साफ हो गई। सड़कें बेहतर बनने लगीं हैं। देश विरोधियों को नौकरी से बाहर कर आतंक के आकाओं की कमर तोड़ने की भी शुरूआत हुई। पिछले दरवाजे से नियुक्ति पाने वालों को नौकरी से निकाला जा रहा है। पत्थरबाजी बंद हो गई। नई औद्योगिक नीति से निवेश आने शुरू हो गए हैं। इसी प्रकार निवेश आता रहा तो यहां की तस्वीर बदल जाएगी।
- डा. एसपी वैद, पूर्व डीजीपी