सूबे में करीब 12 दिन पहले मूसलाधार बारिश और बाढ़ के रूप में कुदरत के कहर के बाद अब पीड़ित लोगों को राहत सामग्री प्राप्त करने के लिए भटकना पड़ रहा है। इसकी शिकायत का कड़ा संज्ञान लेते हुए डीसी जितेंद्र कुमार सिंह ने कई विभागों के जिला स्तर के अधिकारियों की अगुवाई में फ्लाइंग स्क्वायड के लिए टीमों का गठन किया है।
ये टीमें राहत सामग्री वितरण की जांच कर रिपोर्ट देंगे। जिले के अधिकतर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री नहीं मिल रही है। बुद्धल, कालाकोट, थन्नामंडी और मंजाकोट अदि तहसीलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एक हफ्ते बाद भी लोग खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं।
खाने-पीने का सामान और टेंट व अन्य वस्तुएं अभी तक लोगों को सही ढंग से नहीं मिल पाई हैं। वहीं कुछ क्षेत्रों में राहत सामग्री नहीं पहुंचने पर लोगों द्वारा सड़कें जाम कर धरना-प्रदर्शन के मामले भी सामने आ चुके हैं।
आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
डीसी द्वारा बनाई गई फ्लाइंग स्क्वायड की टीमें सभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के औचक दौरे कर वहां प्रदान की जा रही राहत सामग्री की जांच करेंगे। साथ ही पीड़ित लोगों से मुलाकात कर उनसे सामग्री मिलने बारे भी जानकारी प्राप्त करेंगे। डीसी द्वारा गठित फ्लाइंग स्क्वायड की टीमों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि दौरे की रिपोर्ट रोज उनके समक्ष पेश करें।
यदि किसी क्षेत्र में पीड़ितों को राहत सामग्री नहीं मिल रही है तो क्षेत्र के एसडीएम, तहसीलदार व संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
जिले की सात तहसीलें जैसे थन्नामंडी, कोटरंका, दरहाल, राजोरी, कालाकोट, खवास, मंजाकोट और डुंगी ब्लाक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए गठित की गई फ्लाइंग स्क्वायड टीमों में विभिन्न सरकारी विभागों के जिला अधिकारियों को चेयरमैन बनाया गया है। सभी तहसीलों के तहसीलदारों को सदस्य सचिव और ब्लाक विकास अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है।
पहले क्या थी राहत सामग्री बांटने की प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार इससे पहले विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए बनाई गई टीमों में संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम और तहसीलदरों को ही चुना गया था।
उनके साथ अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त को नोडल अधिकारी बनाया गया था लेकिन इसके बावजूद राहत सामग्री वितरित किए जाने में कोई पारदर्शिता नजर नहीं आ रही थी।
पीड़ित परिवारों के बजाए सियासी नेताओं के परिजनों को ही राहत सामग्री मुहैया करवाने के आरोप लग रहे थे।