नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बजट के साथ ही अनुपूरक मांगे पेश करने और बजट की प्रति देर से उपलब्ध कराने के मामले में सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने खासतौर पर पेश किए जाने के दिन ही अनुपूरक मांगों पर चर्चा कराने के लिए कुछ नियमों को निलंबित किए जाने की वित्त मंत्री की मांग पर आपत्ति जताई। विपक्ष ने कहा कि इससे जुड़ा नियम 205 सदन चलाने की प्रक्रिया के बुनियादी नियमों का हिस्सा है। इसे निलंबित नहीं किया जा सकता।
अचानक बजट पेश करने पर भी आपत्ति
आरपीआई के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि बजट बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार ने इसे बिना किसी पूर्व सूचना के पेश कर दिया। सदस्यों के पास इसकी प्रति भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बजट और अनुदान मांगों पर कैसे चर्चा की जा सकती है? कांग्रेस के मनीष तिवारी, टीएमसी के सुदीप बंदोपाध्याय ने भी प्रेमचंद्रन का समर्थन किया।
विपक्ष ने कहा पूरे नहीं हुए वादे
कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि जब अनुच्छेद 370 खत्म किया गया तब सरकार ने कई दावे किए थे। कहा था कि इससे राज्य में विकास होगा। आतंकवाद पर लगाम कसी जाएगी। मगर करीब ढाई साल बाद राज्य की स्थिति बदतर हुई है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर वहां विधानसभा चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे। पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मामले में सरकार स्थिति साफ क्यों नहीं कर रही?
कुल बजट 112950 करोड़
राजस्व खर्च 71615 करोड़
पूंजीगत खर्च 41335
राजकोषीय घाटा 8970 करोड़
अनुपूरक अनुदान 18860.32 करोड़ (वर्ष 2021-22 के लिए)