श्रीनगर के चीफ जूडिशियल मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पुलिस ने मंगलवार को सीआरपीएफ के एक अधिकारी समेत एक महिला डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया। इन दोनों पर एक स्थानीय शख्स को झूठे कत्ल और बलात्कार के षड्यंत्र में फंसाने का आरोप है।
श्रीनगर के जैनकूट स्थित सीआरपीएफ की 44 बटालियन में तैनात अधिकारी सत्यवीर सिंह वर्मा और अनंतनाग जिले के मट्टन की रहने वाली महिला डॉक्टर पवनजीत कौर ने पारिमपुरा थाने के प्रोबेशनरी सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद जमील के साथ मिलकर दीपक कुमार नामी एक स्थानीय शख्स को गलत आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।
दीपक श्रीनगर के कुक्कर बाजार माईसुमा का रहने वाला है। उस पर बलात्कार (376) के साथ-साथ हत्या के प्रयास (307) का आरोप लगाया गया था। कहा गया था कि दीपक द्वारा सितंबर 2013 में 44 बटालियन स्थित महिला डॉक्टर के ऑफिस में घटना को अंजाम देने का प्रयास किया गया, जहां वह कांट्रैक्चुअल मेडिकल अफसर के तौर पर नियुक्त थी
14 वर्षों पुराने प्रेम संबंध से जुड़ा था मामला
शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट में अपनी दलील पेश की कि महिला डॉक्टर के दीपक कुमार के साथ पिछले 14 वर्षों से प्रेम संबंध थे। वकील ने यह भी बताया कि महिला डॉक्टर को जब कांट्रैक्ट पर सीआरपीएफ की 44 बटालियन में नौकरी मिली तो वहां उसके अवैध संबंध सीआरपीएफ अधिकारी सत्यवीर सिंह वर्मा के साथ बने।
जब महिला डॉक्टर को लगा कि इस बात की भनक दीपक को लग गई है तो उसने अधिकारी के साथ मिलकर दीपक के खिलाफ षड्यंत्र रचा और उसे एक गलत आरोप में फंसाया और दीपक के खिलाफ पारिमपुरा थाने में धारा 376, 511, 452, 307 और 323 के अंतर्गत मामला दर्ज करवा दिया।
दोनों ने मिलकर रची थी ये साजिश
दीपक के वकील ने यह भी बताया कि उस समय एक सोची समझी साजिश के तहत महिला डॉक्टर ने दीपक को अपने ऑफिस बुलाया और उस पर बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया। जबकि उस समय सीआरपीएफ अधिकारी द्वारा उस पर दो गोलियां भी चलाई गई, लेकिन दीपक बिना घायल हुए वहां से भाग निकला।
डॉक्टर और अधिकारी द्वारा पुलिस में झूठी शिकायत करने के बाद उसे धर दबोचा गया। वकील द्वारा जांच अधिकारी मोहम्मद जमील पर उन दोनों का साथ देने का भी आरोप लगाया और कहा कि जमील की सहायता से ही यह पूरा षड्यंत्र रचा गया।
गौरतलब है कि जांच अधिकारी मोहम्मद जमील के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज की गई। कोर्ट के अनुसार, इस समय पर जांच को गलत नहीं ठहराया जा सकता न ही इनके खिलाफ अवैधता का आरोप लगाया जा सकता है।