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कश्मीर मसले का हल मोदी सरकार में ही संभव : फारूक अब्दुल्ला

Wed, 28 Dec 2016 02:43 PM IST
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
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पीएम नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला
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पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. फारूक अब्दुल्ला का मानना है कि कश्मीर मसले का हल मोदी की सरकार में ही संभव है। दावा किया कि उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद इस दिशा में कुछ न कुछ सकारात्मक पहल होगी। कश्मीर के सभी पक्षकारों तथा पड़ोसी पाकिस्तान से बातचीत भी इसमें शामिल है। 
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में फारूक ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर कश्मीर मसले पर बात की थी। इसमें सभी पक्षकारों से बात तथा अन्य मुद्दे भी शामिल थे। लग रहा है कि उनकी मुलाकात रंग ला रही है। कुछ मुद्दों पर अमल होता दिख रहा है। लेकिन वे फिलहाल यह नहीं बताएंगे कि ये मुद्दे क्या हैं। 

उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे का हल सिर्फ और सिर्फ बातचीत से निकल सकता है। इसमें हुर्रियत सहित सभी पक्षकारों को शामिल किया जाना चाहिए। कहा कि हिंसा के दौरान गृह मंत्री के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने घाटी का दौरा किया था। 
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'हुर्रियत को बातचीत का न्योता गृह मंत्री की ओर से नहीं दिया गया'

फारुक अब्दुल्ला का बयान - फोटो : File Photo
हुर्रियत को बातचीत का न्योता गृह मंत्री की ओर से नहीं दिया गया, बल्कि पीडीपी अध्यक्ष की ओर से दिया गया। इससे उन्होंने न्योता स्वीकार करने से मना कर दिया। गृह मंत्री की ओर से चिट्ठी लिखी गई होती तो उसकी बात ही कुछ और होती। इससे पहले भी पडगांवकर समिति और जस्टिस सगीर समिति बनी थी। इन दोनों समितियों की रिपोर्ट का क्या हुआ।


दरअसल लोगों का पॉलीटिकल सिस्टम से एतबार उठने लगा है। पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा के नेतृत्व में आई समिति से सभी मिले। पूर्व मंत्री कमल मोरारका से भी सभी पक्षों ने बात की। दरअसल केंद्र सरकार के तरीके से लोग सहमत नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग जो भारत में भी हैं और पाकिस्तान में भी, वे बातचीत को आगे नहीं बढ़ने देंगे।

वे कभी नहीं चाहते कि अमन बहाल हो। पीडीपी-भाजपा के एजेंडा ऑफ एलायंस में भी हुर्रियत सहित सभी पक्षों से बात का जिक्र है तो अब तक इस दिशा में क्या किया गया। अमन से ही विकास संभव है। अमन दबाव, जेलों में भरने तथा बंदूक के बल पर नहीं आएगा बल्कि इससे आग और भड़केगी। बातचीत से ही अमन संभव है। 
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वाजपेयी-आडवाणी ने भी की थी हुर्रियत से बात

पूर्व पीएम अटल जी और मुफ्ती मोहम्मद सईद - फोटो : File Photo
उन्होंने फिर दोहराया कि पाकिस्तान के पास कश्मीर का जो हिस्सा है उसे भारत नहीं ले सकता है और हमारे पास का हिस्सा पाकिस्तान नहीं ले सकता। इस वजह से दोनों देशों को मिल बैठकर शांति का मार्ग निकालना चाहिए। 

फारूक ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने भी हुर्रियत से बात की थी। ऐसा लगता था कि अटल के समय कश्मीर समस्या का हल निकल आएगा, लेकिन दुर्भाग्य से वे दोबारा सत्ता में नहीं लौटे और चीजें जहां की तहां रह गईं।

केंद्र सरकार को यह मानना चाहिए कि कश्मीर समस्या एक राजनीतिक मुद्दा है और इसका समाधान भी राजनीतिक तरीके से ही होगा। इसमें जितनी देर होगी मुसीबतें उतनी ही बढ़ती जाएंगी।  
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