इस बार किसानाें की बैसाखी फीकी रहने से वह मायूस हैं। किसानों का कहना है कि हर बार बैसाखी पर्व तक किसान गेहूं की फसल की कटाई शुरू कर देते थे। लेकिन इस बार बारिश और ओलावृष्टि के चलते खेतों में फसलें खराब हो गईं। सभी की हालत खराब हो गई है।
त्योहार की बात तो दूर अब किसानाें को रोटी के लाले पडे़ हुए हैं। किसान करतार चंद, चुन्नी लाल, विशंभर दास का कहना है कि गत वर्ष धान की फसल चौपट हो गई। रही सही कसर इस बार बारिश न गेहूं की फसल खराब कर कर दी। किसानों का कहना है अव मवेशियों के लिए चारा भी नहीं रहा।