चार महीने की ‘उम्मीद’ से नए परिवार की उम्मीद बंध गई है। बस स्टैंड में बस में मिली लावारिस बच्ची को आखिरकार नौ दिन के बाद नया आशियाना मिल ही गया। कानूनी प्रक्रिया और जांच पड़ताल पूरी होने के बाद नानक नगर के रहने वाले दंपति को चार महीने की बच्ची को सौंप दिया।
बच्ची की कस्टडी मिलते ही दंपति और उनके परिवार के सभी सदस्यों के चेहरे पर खुशी की चमक देखने को मिली। बच्ची को असिस्टेंट प्रोफेसर मां और बिजनेसमैन पिता का साया मिला है। दीपावली से कुछ दिन पहले बच्ची को नयी जिंदगी के साथ नये रिश्ते और प्यार करने वाले मां-बाप की सौगात तोहफे में मिली है।
दीपावली के मौके पर अपने घर पर लक्ष्मी स्वरूप नन्हीं उम्मीद का स्वागत करने के लिए पूरा परिवार बेताब है। कानूनी प्रक्रिया के बाद बस स्टैंड पुलिस थाने के अधिकारी ने अस्पताल के सीएमओ को कानूनी कागजात सौंप कर देर शाम को नानक नगर के दंपति को कस्टडी दी।
इस मौके पर उम्मीद को घर ले जाने के लिए नानी, दादी और पूरा परिवार उत्साहित दिखा। एसएमजीएस अस्पताल की सीएमओ डा. शाजिया ने बताया कि कागजात की छानबीन कर ली गई है। बच्ची का स्वास्थ्य थोड़ा खराब है। बुधवार को सुबह शिशु विशेषज्ञ से बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण करवाने के बाद डाक्टर डिसचार्ज करते हैं, तो वह अपने घर ले जा सकते हैं।
गौरतलब है कि चार महीने की उम्मीद छह अक्तूबर को सुबह के समय बस स्टैंड में छंब रूट की बस की बैक सीट पर मिली थी। उसे बस स्टैंड में घूमने वाला भिखारी लेकर भाग रहा था कि सुलभ शौचालय में काम करने वाली कर्मचारी रानी ने रोक कर पुलिस स्टेशन तक पहुंचाया।
‘ख्वाहिश’ को भी इंतजार
उम्मीद की तरह ही निको वार्ड में मां-बाप द्वारा छोड़ी नवजात बच्ची ‘ख्वाहिश’ को भी मां-बाप के मिलने का इंतजार है। शालामार अस्पताल परिसर की पुलिस चौकी के अधिकारी बच्ची के अभिभावकों को तलाशने की कोशिश कर रहे।