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सावधान: कश्मीर में बढ़ रहा नकली दवाइयों का धंधा

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कश्मीर में नकली दवाइयों का धंधा दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। डाक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर के अध्यक्ष ने इस अवैध धंधे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार अभी तक इस धंधे पर नकेल कसने में असफल रही है।
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डाक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर के अध्यक्ष डा. निस्सार-उल-हस्सन ने एक बार फिर से सरकार पर सवालिया निशान खड़ा करते हुए उसे कटघरे में खड़ा किया है।

डा. निस्सार के अनुसार राज्य में यह सब सुनियोजित रूप से अंजाम दिया जा रहा है। अमर उजाला के साथ ख़ास बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह सब जो हो रहा है उसमें सरकार का भी पूरा सहयोग है।

दवाई कंपनियों, सरकारी अधिकारियों और दवाई विक्रेताओं के बीच पूरी मिलीभगत है। यही कारण है कि घाटी में यह धंधा बढ़ता ही जा रहा है जो काफी चिंताजनक बात है। नकली दवाइयों के इस बढ़ते धंधे के चलते आम इंसान की जिंदगी खतरे में है।
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इस धंधे पर नकेल कसने में सरकार विफल

ड्रग एंड फूड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (डीएफसीओ) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए निस्सार ने कहा कि 2010-11 में नकली व घटिया दवाइयों की संख्या 21 थी, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा बढ़कर 138 पहुंच गया है, जो साफ इशारा करता है कि यह धंधा कितनी तेजी से बढ़ रहा है।

निस्सार ने कहा कि वर्ष 2006 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें परचेजिंग कमेटी का सदस्य बनाया गया था और तब उन्हें कई बार बैठकों के दौरान कमेटी सदस्यों और सप्लायरों के बीच की मिलीभगत का पता चला।

उनके अनुसार नकली दवाइयों के अधिनियम में 2008 में लाए गए बदलाव के अनुसार, इसमें दोषी पाए जाने वाले को उम्र कैद तक की सजा दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि इस अपराध को नान-बेलेबल बनाया गया है और इसके लिए विशेष न्यायालय गठित करने की मांग भी रखी गई है ताकि जल्द इन मामलों में फैसले सुनाए जाएं। डा. निस्सार ने कहा कि अगर सरकार चाहे तो इस पर पूर्ण रूप से रोक लगा सकती है।
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