बारामुला में कौशल विकास केंद्र की स्थापना जम्मू-कश्मीर के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। इसका उद्देश्य इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई के छात्रों को विश्व स्तर के कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस केंद्र के जरिए बेरोजगार इंजीनियरिंग डिग्री धारकों और नौकरी कर रहे इंजीनियरिंग स्नातकों को अपने करियर में कौशल क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह बात उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को बारामुला में 181.57 करोड़ की लागत से स्थापित कौशल विकास केंद्र का ई-उद्घाटन करने के बाद कही। यह केंद्र राजकीय पॉलिटेक्निक केंद्र में स्थापित किया गया है।
इस अवसर पर उप राज्यपाल ने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को अपने मौजूदा कौशल को प्रासंगिक प्रशिक्षण, रिस्किलिंग और अप-स्केलिंग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हाल के तकनीकी रुझानों में प्रशिक्षण के साथ ही हमारे युवा इस दुनिया में सुरक्षित नौकरियों से लैस हो सकते हैं।इस सेंटर फॉर इंवेंशन, इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड ट्रेनिंग न केवल अभिनव डिजाइन, उद्यमिता विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा बल्कि उद्योग-शैक्षणिक भागीदारी को मजबूत करते हुए युवाओं के बीच रोजगार दर में भी वृद्धि करेगा।
पास आउट छात्रों को देेंगे तीन माह का प्रशिक्षण
उपराज्यपाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजन में शामिल छात्रों के साथ अपने विचार साक्षा करते हुे कहा कि पिछले सप्ताह आईआईटी वर्ल्ड समिट 2020 के दौरान, मैंने कोविड के बाद की दुनिया के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के साथ नए अवसर सामने आएंगे। ऐसे परिदृश्य में, हमें अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को न केवल प्रासंगिक बनाए रखना होगा। बीटेक और एम टेक पास आउट को औद्योगिक रोबोटिक्स में तीन महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा और प्रशिक्षण के साथए वे मोटर वाहन और विनिर्माण उद्योग में नियोजित होने के लिए तैयार होंगे।
वर्तमान में178 छात्र
इस अवसर पर एलजी को बताया गया कि वर्तमान में 178 छात्रों ने विभिन्न व्यावसायिक कौशल विकास पाठ्यक्त्रस्मों तहत केंद्र में दाखिला लिया है। हालांकि अधिकतम उम्मीदवारों को लाभ प्रदान करने के लिए इस केंद्र की क्षमता 1400 तक बढ़ाई जाएगी।