घेराबंदी के बाद शुरू हुई फायरिंग
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही तलाशी दल संदिग्ध ठिकाने की ओर बढ़े, वहां छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला, जिसके बाद पूरे पहाड़ी क्षेत्र में गोलियों की गूंज सुनाई देने लगी। घने सुरक्षा घेरे के बीच दोनों ओर से रुक-रुक कर भारी गोलीबारी जारी है। हालांकि, भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम और अत्यधिक घना जंगल होने के कारण तात्कालिक रूप से किसी के हताहत होने या मारे गए आतंकियों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
तकनीक का सहारा
जंगलों और ऊंचे पहाड़ी रास्तों का फायदा उठाकर आतंकी भाग न सकें, इसके लिए सेना ने आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया है। बडगाम पुलिस और सेना की राष्ट्रीय राइफल्स ने पूरे इलाके में हाइटेक सर्विलांस ड्रोन और थर्मल इमेजिंग कैमरों को तैनात किया है। इसके साथ ही, आस-पास के बेस कैंप से अतिरिक्त दल को यूसमर्ग के ऊपरी इलाकों के लिए रवाना कर दिया गया है।
संवेदनशील समय में मुठभेड़
मुठभेड़ ऐसे संवेदनशील मोड़ पर हो रही है जब करीब दो दिन पहले ही श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने बडगाम जिला प्रशासन से यूसमर्ग को पर्यटकों के लिए पुनः खोलने की जोरदार मांग की थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद से ही यूसमर्ग के मुख्य हिस्सों में सुरक्षा कारणों से आम पर्यटकों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लागू थीं। स्थानीय होटल मालिकों, घोड़ा चालकों और गाइडों के आर्थिक संकट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच इसे बहाल करने पर विमर्श चल रहा था। लेकिन ठीक उसी बीच, सुरक्षा ग्रिड को भेदकर इस जंगली बेल्ट में आतंकियों की सक्रियता दिखने से प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क हो गई हैं।
इलाके में कड़ा पहरा
आतंकवाद विरोधी इस अभियान के मद्देनजर बडगाम पुलिस ने जिला स्तर पर चौकसी कई गुना बढ़ा दी है। यूसमर्ग, चरार-ए-शरीफ और नजदीकी पाखरपोरा रूट पर जाने वाले सभी वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है। सुरक्षा अधिकारियों ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे जब तक ऑपरेशन पूरी तरह खत्म न हो जाए, तब तक जंगलों और ऊपरी ढलानों की ओर जाने से पूरी तरह परहेज करें।