फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बठिंडी आईईडी साजिश केस: लश्कर-टीआरएफ के संपर्क में था नदीम, एनआईए कोर्ट से नहीं मिली जमानत; ये है वजह

Thu, 03 Sep 2026 08:55 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू

सार

एनआईए की विशेष अदालत ने 2021 के बहुचर्चित बठिंडी आईईडी षड्यंत्र मामले में आरोपी नदीम अय्यूब राथर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि जांच सामग्री प्रथमदृष्टया उसकी एक बड़े आतंकी षड्यंत्र में संलिप्तता दर्शाती है। 
विज्ञापन
बठिंडी आईईडी षड्यंत्र केस - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने 2021 के बहुचर्चित बठिंडी आईईडी षड्यंत्र मामले में आरोपी नदीम अय्यूब राथर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री प्रथमदृष्टया आरोपी की एक बड़े आतंकी षड्यंत्र में संलिप्तता की ओर इशारा करती है। ऐसे में उसे जमानत पर रिहा करने से अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाहों को प्रभावित करने और न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने का गंभीर खतरा है।

विज्ञापन


विशेष न्यायाधीश (एनआईए मामले) प्रेम सागर ने बुधवार को शोपियां निवासी नदीम अय्यूब राथर की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए इसे नामंजूर कर दिया। आरोपी जुलाई 2021 से हिरासत में है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी, 121-ए और 122 के अलावा यूएपीए तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं।

बचाव पक्ष के वकील एचयू भट ने दलील दी कि आरोपी करीब पांच वर्षों से जेल में है और त्वरित सुनवाई उसका सांविधानिक अधिकार है। वहीं, एनआईए के विशेष लोक अभियोजक केएस पठानिया ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपी के खिलाफ एक मार्च 2023 को आरोप तय किए जा चुके हैं और मामले की सुनवाई जारी है। अपराध की गंभीरता और राज्य के व्यापक हितों को देखते हुए केवल लंबी अवधि से हिरासत में होने के आधार पर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन


लश्कर और टीआरएफ के आकाओं के संपर्क में था
एनआईए की जांच में सामने आया कि राथर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिये कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ। वह पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-ताइबा और टीआरएफ के आकाओं के संपर्क में था। जांच एजेंसी के मुताबिक, उसने अल-जिहाद जम्मू एंड कश्मीर और गाजी ऑफिशियल समेत कई व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए थे। इन ग्रुपों का इस्तेमाल कथित तौर पर आतंकी प्रचार, मारे गए आतंकियों के महिमामंडन और भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने के लिए किया जा रहा था।

यह था पूरा मामला
27 जून 2021 को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जम्मू के बठिंडी इलाके से नदीम-उल-हक नामक आरोपी को इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के साथ गिरफ्तार किया था। एनआईए के अनुसार, इस आईईडी का इस्तेमाल आम नागरिकों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने तथा भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश के तहत किया जाना था। जांच के दौरान एक जुलाई 2021 को नदीम अय्यूब राथर और तालिब-उर-रहमान को भी गिरफ्तार किया गया। बाद में मामले की जांच एनआईए ने अपने हाथ में ले ली थी। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें