-जम्मू-कश्मीर के 13,550 कर्मियों को स्थायी करने की मांग
चेतावनी-सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो तेज करेंगे आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत जम्मू-कश्मीर में 13,550 कर्मी स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। राज्य सरकार से पॉलिसी बनाकर स्थायी करने की मांग को लेकर शनिवार को गांधीनगर अस्पताल में धरना दिया।
धरने पर बैठी महिला कर्मचारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से न्यूनतम मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना महामारी जैसी विपरीत और गंभीर परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर अग्रिम पंक्ति के योद्धा के रूप में काम किया। इसके बावजूद सरकार लगातार उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। नियमित कर्मचारियों के समान ही काम करने के बाद भी उन्हें न तो स्थायी दर्जा दिया जा रहा है और न ही उचित वेतन-भत्ते मिल रहे हैं।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि देश के दूसरे राज्यों में एनएचएम के स्टाफ को स्थायी करने के लिए पॉलिसी बनाकर उसे लागू किया गया। आज वहां स्थायी होने के बाद एनएचएम कर्मी कार्य कर रहें हैं। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो कर्मचारियों को मजबूरन हड़ताल और धरना प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक राज्य सरकार उनकी सेवा स्थायी करने की मुख्य मांग पर लिखित आश्वासन या ठोस नीति जारी नहीं करती, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। यदि सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा
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अस्पतालों में कामकाज प्रभावित
एनएचएम स्टाफ के हड़ताल पर जाने से अस्पताल के आपातकालीन, ओपीडी, आईसीयू और पैथोलॉजी लैब जैसे मुख्य विभागों का कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है। एनएचएम नर्सों, लैब तकनीशियनों, फार्मासिस्टों और डेटा एंट्री ऑपरेटर्स धरने पर रहे।