जम्मू जिले का अंतिम गांव गिगड़ियाल खुद की भौगोलिक स्थिति की वजह से खास है। पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) की सीमा से करीब तीन किमी दूर यह गांव एक समय खुद को अनजान खतरे के रूप में पाता रहा है। यहां कभी भी पाकिस्तान के दहशतगर्दों की तरफ से गोलीबारी कर दी जाती और लोग खौफ में जीते। 2017 से यहां गोलीबारी बंद है। अब लोगों को खुद की जमीन पर लहलहाती फसलें देखने का इंतजार है।
चुनावी माहौल के बीच गांव के सरपंच शाम लाल से मुलाकात हुई तो उन्होंने बताया कि जम्मू से करीब 70 किमी दूर हमारा गांव अब भी जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की पहुंच से बाहर है। नजदीक की खौड़ तहसील तक तो वह आते हैं लेकिन यहां आना भूल जाते हैं। दस साल में कोई एक-दो बार अधिकारी यहां आए। हमसे शिकायत भी ली। इसके बाद उस पर काम कभी नहीं हुआ। ऐसा लगता है कि जैसे चिनाब के ऊपर से गुजरते समय पुल से हमारी चिट्ठी को नदी में बहा दिया जाता है। यह केवल जुमला नहीं, अब गांव के लोगों के बीच मजाक बन गया है। ऐसा मजाक जिसके जरिए वे अपने दर्द को हल्का कर लेते हैं।