सांबा। केंद्र एवं राज्य शासन सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या को बढ़ाने के लिए कई प्रकार की योजनाएं अमल में ला रही हैं, लेकिन इनमें विद्यार्थियों की संख्या नहीं बढ़ रही है। इसका कारण यह है कि आधे से अधिक शिक्षकों के रिक्त पद पडे़ रहते हैं।
ऐसे में अभिभावक भी बच्चों को सरकारी स्कूलों के बदले निजी स्कूलों में ही शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही नहीं सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को बीएलओ का कार्यभार भी सौंपा गया। कई ऐसे स्कूल है जिनमें एक ही शिक्षक है। उन्हें बीएलओ लगाया गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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जिले के सीमावर्ती कस्बा राजपुरा के सरकारी हासस में 25 रिक्त पद हैं। जिनमें शिक्षकों के 4 रिक्त हैं। लेक्चरार के 12 पद हैं और 6 रिक्त हैं, मास्टर ग्रेड के 4 पद हैं 3 रिक्त हैं, फिजिकल टीचर का एक पद रिक्त है। स्कूल में गणित, अंग्रेजी, शिक्षा, राजनीति शास्त्र, अर्थ शास्त्र, कामर्स, बॉटनी के पद रिक्त हैं। स्कूल में 257 छात्र हैं। पुरानी इमारत को तोड़ दिया गया है, अन्य कमरों की मरम्मत कराई गई है।
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हम ने मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को इस बारे में ज्ञापन सौंपा था, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हुआ है। अब वह शिक्षा निदेशक से भेंट कर उन्हें समस्या बताएंगें।
-राधा कृष्ण, बीडीसी अध्यक्ष, राजपुरा, सांबा।
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पंचायत चक दुलमा के चक लाला में सरकारी प्राइमरी स्कूल है, वहां एक ही शिक्षक है। उसे बीएलओ लगा दिया गया है। 15 सितंबर से मतदाता सूचियों का काम शुरू हो रहा है, ऐसे में स्कूल पर ताले लटक जाएंगे। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। सरकारी स्कूलों में कैसे छात्रों की संख्या बढ़ पाएगी।
-विनय शर्मा, सरपंच चक दुल्मा, पंचायत, राजपुरा।
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राजपुरा सरकारी हासस स्कूल के शिक्षकों के रिक्त पदों की सूची आई थी, हमने शिक्षा निदेशक को भेज दी है। जिन स्कूलों में एक-एक शिक्षक हैं, जिन्हें बीएलओ बनाया गया है उन स्कूलों में शिक्षकों को नियुक्त करने के बारे में निर्णय लिया जाएगा।
-जसवंत सिंह, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, सांबा।