जम्मू-कश्मीर सरकार आजादी का अमृत महोत्सव तो मना रही है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में स्थिति काफी खराब है। स्कूलों में बुनियादी ढांचा, शिक्षा गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी चल रही है। प्रदेश में कुल 29708 सरकारी स्कूलों में से 2,230 ऐसे हैं, जो एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इनमें से 95 फीसदी स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों के हैं।
20 फीसदी यानी, 5941 स्कूलों तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है। 1632 स्कूलों में पद खाली हैं और 56 फीसदी ये स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। वहीं 36 फीसदी स्कूलों में लाइब्रेरी है। यूनेस्को ने देशभर के स्कूलों की रिपोर्ट जारी की है। इसमें जम्मू-कश्मीर के स्कूलों की स्थिति काफी खराब है। कोविड के कारण पढ़ाई ऑनलाइन मोड़ में थी, लेकिन प्रदेश में सिर्फ 12 फीसदी यानी 3564 स्कूलों में ही इंटरनेट की सुविधा है। ऐसे में शिक्षकों के लिए बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाना बड़ी चुनौती है।
36 फीसदी स्कूल बिना बिजली के
हालांकि स्कूलों में शौचालय, स्वच्छ जल की व्यवस्था में काफी अच्छी है, लेकिन अभी भी 64 फीसदी स्कूलों में लाइब्रेरी और 36 फीसदी स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है। 95 फीसदी स्कूलों में आईसीटी लैब नहीं हैं और 44 फीसदी स्कूलों में अच्छे क्लासरूम की दरकार है। जम्मू-कश्मीर अपने पड़ोसी राज्य हिमाचल और पंजाब से स्कूलों में इंटरनेट सुविधा, लाइब्रेरी और आईटीसी लैब के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है।
स्कूलों में 47 फीसदी महिला शिक्षक
जम्मू-कश्मीर के 29708 सरकारी स्कूल हैं, जिसमें 1,76,459 शिक्षक हैं। इनमें 47 फीसदी महिला शिक्षक हैं। महिला शिक्षकों के मामले में भी जम्मू-कश्मीर अपने पड़ोसी राज्य पंजाब से 75 फीसदी और हिमाचल से 51 फीसदी पीछे है।